इस सड़क के बाद खत्म हो जाती है दुनिया, भूलकर भी यहां अकेले नहीं जाते लोग…

इस सड़क के बाद खत्म हो जाती है दुनिया, भूलकर भी यहां अकेले नहीं जाते लोग…

जरा हट के।
स्पेशल डेस्क
तहलका 24×7
                 आपके दिमाग में कभी न कभी ये सवाल जरूर आया होगा कि दुनिया कहां खत्म हो रही है या दुनिया का आखिरी छोर क्या है? लेकिन शायद ही आपको इस सवाल का जवाब मिल पाया होगा। दुनिया के आखिरी छोर का पता नहीं, लेकिन एक ऐसी सड़क जरूर है जिसे दुनिया का आखिरी सड़क माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस सड़क के बाद दुनिया खत्म हो जाती है।

इस सड़क का नाम E-69 है। इससे पहले आपने शायद ही कभी इस सड़क के बारे में सुना हो। E-69 सड़क को दुनिया का सबसे आखिरी सड़क माना जाता है। ई-69 एक हाइवे है, जो करीब 14 किलोमीटर लंबा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस हाइवे पर ऐसी कई जगहें हैं, जहां अकेले पैदल चलना या फिर यहां गाड़ी चलाना भी मना है। तो चलिए आज जानते हैं इस सड़क के बारे में जिसे दुनिया की आखिरी सड़क कहा जाता है… 

इस सड़क को दुनिया का सबसे अंतिम छोर माना जाता है। नॉर्थ पोल यानी उत्तरी ध्रुव के बारे में तो आपने जरूर सुना होगा, जो पृथ्वी का सबसे सुदूर उत्तरी बिंदु है। ये वही बिंदु है, जहां पर पृथ्वी की धुरी घूमती है। ये नॉर्वे का आखिरी छोर है। यहां से आगे जाने वाले रास्ते को ही दुनिया की आखिरी सड़क माना जाता है। इसका नाम ई-69 है, जो पृथ्वी के छोर और नॉर्वे को जोड़ती है। ये वो सड़क है, जिसके आगे कोई सड़क ही नहीं है। बस बर्फ ही बर्फ और समुद्र ही समुद्र दिखाई देता है।
दुनिया की आखिरी सड़क होने की वजह से लोग इस पर जाना चाहते हैं और देखना चाहते हैं कि दुनिया का आखिरी छोर कैसा लगता है। लेकिन यहां अकेले जाना या ड्राइविंग करना प्रतिबंधित है। अगर आपको दुनिया की आखिरी सड़क की सैर करनी है तो आपको ग्रुप में जाना पड़ेगा, क्योंकि बर्फ ही बर्फ होने की वजह से यहां जाने वाले अक्सर रास्ता भूल जाते हैं। इसके अलावा ठंड भी बहुत ज्यादा होती है, इसलिए 14 किलोमीटर लंबे इस रास्ते पर कोई भी अकेला नहीं जाता।

# जानिए और भी हैरान करने वाली बातें

इस जगह के बारे में हैरान करने वाली बात ये है कि ये सड़क उत्तरी ध्रुव के पास है, जिसके चलते सर्दियों के मौसम में यहां रात ही रात होती है। वहीं गर्मियों के मौसम में यहां सूरज कभी नहीं डूबता है। कभी-कभी तो यहां छह महीने तक लगातार सूरज दिखाई ही नहीं देता और रात ही रात होती है। यानी करीब 6 महीने तक लोग रात के अंधेरे में ही रहते हैं। गर्मी में यहां तापमान जीरो डिग्री सेल्सियस के आस-पास होता है, जबकि ठंड में ये -45 डिग्री तक नीचे चला जाता है।

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