एकात्म मानववाद एंव अंत्योदय दर्शन के प्रणेता पं. दीनदयाल की जयन्ती पर अर्पित किया श्रद्धा-सुमन

एकात्म मानववाद एंव अंत्योदय दर्शन के प्रणेता पं. दीनदयाल की जयन्ती पर अर्पित किया श्रद्धा-सुमन

जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
                 भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में भाजपा जन ने पण्डित दीन दयाल उपाध्याय के 105वीं जयन्ती पर खरका कालोनी स्थित पार्क में पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के मूर्ति पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। जिलाध्यक्ष ने उपस्थित भाजपा के कार्यकर्ताओं को पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जी के बारे में विस्तार से बताते हुये कहा कि एकात्म मानववाद और अंत्योदय दर्शन के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की आज जयंती है, “हमारी राष्ट्रीयता का आधार भारत माता है केवल माता शब्द हटा दीजिए, तो भारत जमीन का टुकड़ा मात्र बनकर रह जाएगा” यह विचार हैं पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के थे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनकर्ता और भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 105 साल पहले मथुरा में हुआ था, चंद्रभान नांगला नामक गांव के निवासी भगवती प्रसाद उपाध्याय रेलवे में कर्मचारी थे, वह अपनी गर्भवती पत्नी रामप्यारी के साथ ट्रेन से घर लौट रहे थे, जब स्टेशन पर ही विषम परिस्थितियों के बीच 25 सितंबर 1916 को दीनदयाल उपाध्याय जी का जन्म हुआ, उनका बचपन बहुत ही कष्टप्रद परिस्थितियों में बीता 3 साल की आयु में ही पिता की मौत हो गई इसके बाद मां का भी साथ केवल 7 वर्ष की अवस्था में छूट गया इसके बाद पालन-पोषण और पढ़ाई लिखाई ननिहाल में रहकर हुई, आगरा और प्रयागराज से शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने नौकरी नहीं की और वह RSS के प्रचारक बन गए।

राज्यमंत्री गिरीश चन्द्र यादव ने बताया कि देश की आजादी के बाद उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ मिलकर भारतीय जनसंघ की नींव रखी 11 फरवरी 1968 की रात रेलवे यात्रा के दौरान मुगलसराय रेलवे जंक्शन के पास रहस्यमयी हालत में उनकी लाश मिली थी आज तक उनकी मौत को लेकर खुलासा नहीं हो सका है, उन्होंने कहा कि वह बचपन से ही मेधावी थे दीनदयाल जी परीक्षा में हमेशा प्रथम स्‍थान पर आते थे उन्‍हेंने मैट्रिक और इण्टरमीडिएट दोनों ही परीक्षाओं में गोल्ड मैडल प्राप्‍त किया था। इन परीक्षाआ को पास करने के बाद वे आगे की पढ़ाई करने के लिए एस.डी. कॉलेज, कानपुर में प्रवेश लिया वहॉ उनकी मुलाकात श्री सुन्दरसिंह भण्डारी, बलवंत महासिंघे जैसे कई लोगों से हुआ इन लोंगों से मुलाकात होने के बाद दीनदयाल जी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यक्रमों में रुचि लेने लगे।
पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि भारतीय जनसंघ की स्थापना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा वर्ष 1951 में किये और दीनदयाल उपाध्याय को प्रथम महासचिव नियुक्त किये थे, वे लगातार दिसंबर 1967 तक जनसंघ के महासचिव बने रहे उनकी कार्यक्षमता, खुफिया गतिधियों और परिपूर्णता के गुणों से प्रभावित होकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उनके लिए गर्व से सम्मानपूर्वक कहते थे कि- “यदि मेरे पास दो दीनदयाल हों, तो मैं भारत का राजनीतिक चेहरा बदल सकता हूं”, परंतु अचानक वर्ष 1953 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के असमय निधन से पूरे संगठन की जिम्मेदारी दीनदयाल उपाध्याय के युवा कंधों पर आ गयी। इस प्रकार उन्होंने लगभग 15 वर्षों तक महासचिव के रूप में जनसंघ की सेवा की भारतीय जनसंघ के 14वें वार्षिक अधिवेशन में दीनदयाल उपाध्याय को दिसंबर 1967 में कालीकट में जनसंघ का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।

इस अवसर पर अमित श्रीवास्तव, पूर्व जिलाध्यक्ष हरिश्चंद्र सिंह, विधानसभा प्रभारी अशोक श्रीवास्तव, जिला मंत्री रविंद्र सिंह राजू दादा, उमाशंकर सिंह, श्याम मोहन अग्रवाल, धनंजय सिंह, मीडिया प्रभारी आमोद सिंह, रोहन सिंह, जिलाध्यक्ष पिछड़ा मोर्चा अनिल गुप्ता, विनीत शुक्ला, ब्रह्मेश शुक्ला, जिला महामंत्री किसान मोर्चा इंद्रसेन सिंह, मीडिया प्रभारी किसान मोर्चा विश्व प्रकाश श्रीवास्तव, सरस गौड़, रामसूरत मौर्य, अवनीश यादव, मंडल अध्यक्ष गण अमित श्रीवास्तव, राज केशर पाल, विकास शर्मा, मनोज तिवारी, सुनील सेठ, अभिषेक श्रीवास्तव, जगमेंद्र निषाद, महेंद्र यादव, संजय पाठक, राजेश कन्नौजिया, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष रागिनी सिंह, विमला श्रीवास्तव, प्रियंका श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहें।
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