केंद्र की सख्ती के बाद बाबा रामदेव ने जताया खेद, वापस ली अपनी बात

केंद्र की सख्ती के बाद बाबा रामदेव ने जताया खेद, वापस ली अपनी बात

# कहा- एलोपैथी चिकित्सा पद्धति ने बहुत की है प्रगति..

लखनऊ/दिल्ली।
विजय आनंद वर्मा
तहलका 24×7
               केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने एलोपैथिक दवाओं के खिलाफ योग गुरु रामदेव की टिप्पणियों को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की। रामदेव को लिखे पत्र में हर्षवर्धन ने कहा कि उनकी टिप्पणी कोरोना योद्धाओं का अपमान है और इससे देश की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा, आपके बयान से स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल टूटेगा और कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई कमजोर होगी। देर रात, बाबा रामदेव ने खेद जताते हुए अपना बयान वापस ले लिया। साथ ही केंद्रीय मंत्री के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि हम एलोपैथी चिकित्सा विज्ञान के विरोधी नहीं है। जीवन रक्षा प्रणाली में एलोपैथी चिकित्सा पद्धति ने बहुत प्रगति की है। उन्होंने ट्वीट के जरिये भी स्पष्ट किया कि चिकित्सा पद्धतियों के संघर्ष के इस पूरे विवाद को खेदपूर्वक विराम देते हुए मैं अपना वक्तव्य वापस लेता हूं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एलोपैथिक दवाओं ने करोड़ों लोगों की जिंदगी बचाई है और इससे लाखों लोगों के मारे जाने की टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। आज अगर देश में कोरोना से मृत्यु दर सिर्फ 1.13 प्रतिशत और रिकवरी रेट 88 प्रतिशत से अधिक है तो उसके पीछे एलोपैथी और उसके डाक्टरों का अहम योगदान है। हर्षवर्धन ने कहा, आपको पता होना चाहिए कि चेचक, पोलियो, इबोला, सार्स और टीबी जैसे गंभीर रोगों का निदान एलोपैथी ने ही किया है। आपके द्वारा एलोपैथी को तमाशा, बेकार और दिवालिया कहा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

हर्षवर्धन ने कहा, बाबा रामदेव, आप एक सार्वजनिक व्यक्ति हैं और आपका बयान मायने रखता है। मुझे लगता है कि आपको समय और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोई बयान देना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि आप इसके बारे में गंभीरतापूर्वक विचार करेंगे और दुनियाभर के कोरोना योद्धाओं की भावनाओं का सम्मान रखते हुए अपना बयान वापस ले लेंगे।

# क्या बोले योगगुरु बाबा रामदेव 

बता दें कि सोशल मीडिया पर योगगुरु बाबा रामदेव का बयान सामने आने के बाद से ही समूचे देश के एलोपैथिक चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों में जबरदस्त आक्रोश देखा गया। वीडियो का हवाला देते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का आरोप है कि रामदेव ने एलोपैथी चिकित्सा को मूर्खतापूर्ण विज्ञान बताया है। उनका कहना है कि रेमडेसिविर, फेबिफ्लू और भारत के औषधि महानियंत्रक द्वारा स्वीकृत अन्य दवाएं कोरोना मरीजों का इलाज करने में नाकाम साबित हुई हैं। इस बीच पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण की ओर से स्पष्टीकरण भी दिया गया कि बाबा ने यह बयान आधुनिक चिकित्सा पद्धति और अच्छे चिकित्सकों के खिलाफ नहीं दिया, लेकिन चिकित्सकों की नाराजगी दूर नहीं हुई है। 

प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संघ उत्तराखंड के डॉ. नरेश नपलच्याल ने बताया कि बाबा रामदेव का बयान कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे चिकित्सकों व स्टाफ का निरादर है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन की पहल का स्वागत है, पर हम इससे संतुष्ट नहीं हैं। जिस तरह से वीडियो जारी कर चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों का अपमान किया गया, रामदेव ठीक उसी तरह सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

फेडरेशन आफ आल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी डॉ. विनोद कुमार ने कहा, बाबा रामदेव के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने वाले तमाम चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को बाबा रामदेव के इस बयान से ठेस पहुंची है।

वहीं योगगुरु बाबा रामदेव ने कहा कि हम एलोपैथी चिकित्सा विज्ञान के विरोधी नहीं है। जीवन रक्षा प्रणाली में एलोपैथी चिकित्सा पद्धति ने बहुत प्रगति की है। उन्होंने ट्वीट के जरिये भी स्पष्ट किया कि चिकित्सा पद्धतियों के संघर्ष के इस पूरे विवाद को खेदपूर्वक विराम देते हुए मैं अपना वक्तव्य वापस लेता हूं।
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