क्रिसमस स्पेशल ! त्याग, प्रेम और क्षमा की प्रतिमूर्ति थे यीशु मसीह

क्रिसमस स्पेशल ! त्याग, प्रेम और क्षमा की प्रतिमूर्ति थे यीशु मसीह

स्पेशल डेस्क।
राजकुमार अश्क
तहलका 24×7
                सर्वप्रथम तहलका 24×7 परिवार की तरफ से सभी सुधी पाठकों को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं ढेरों बधाई… प्रभु यीशु मसीह के विषय में एक बात कही जाती है कि उन्होंने उन लोगों को भी माफ करने के लिए भगवान से प्रार्थना की जिन लोगों ने उन्हें सूली पर चढ़ाया था। इस बात से साफ जाहिर होता है कि ईसा मसीह हर मानव के प्रति प्रेम का भाव रखते थे। ईसाई धर्म ग्रंथ बाइबिल में प्रभु यीशु मसीह के विषय में विस्तार पूर्वक जानकारी मिलती है, इस धार्मिक पुस्तक में यीशु का नाम लगभग ९०० बार प्रयोग हुआ है यीशु मसीह को ही ईसाई धर्म के संस्थापक के रूप में जाना जाता है।

इस धर्म को मानने वालों का मानना है कि ये ईश्वर के पुत्र थे, इनके पिता का नाम युसूफ तथा माता का नाम मरियम था। माता मरियम की एक चचेरी बहन थी जिसका नाम एलिज़ाबेथ था और उनके पुत्र का नाम जाॅन था। ईसा मसीह का जन्म ईश्वरीय शक्ति के कारण मरियम के गर्भ से हुआ था जब वह कुआँरी थीं इनका जन्म फिलिस्तीन के बेथलहम में हुआ था उस समय वहाँ पर यहुदियों के राजा रोमन हेरोदस का राज्य था जो कि एक क्रूर राजा था जब उसे पता चला कि एक चमत्कारी बालक का जन्म हुआ है तो वह अत्यधिक भयभीत हो गया और उसने सभी नवजात बच्चों को मारने का आदेश दे दिया। मगर ईश्वरीय प्रभाव के कारण वे बच गये जब वे बडे़ हुए तो उन्होंने अपने पिता का लकड़ी का व्यवसाय अपनाया लगभग 30 साल की उम्र तक उन्होंने उसी व्यवसाय को अपनी जीविका का साधन बनाया था, उसके बाद उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और घूम-घूम कर लोगों को शिक्षा देने लगे।

ईश्वर के प्रति लोगों में बढ़ते विश्वास को देखकर कुछ लोगों को नागवार लगा और उन्होंने इसकी शिकायत रोमन गवर्नर पिलातुस से कर दिया। प्रभु यीशु के ही एक शिष्य जुडास ने उन्हें धोखे से गिरफ्तार करवा दिया। कट्टर पंथियों को खुश करने के लिए पिलातुस ने उन्हें मृत्यु की सज़ा सुनाई। ऐसा कहा जाता है कि यीशु के साथ तमाम तरह के अमानवीय व्यवहार किया गया। उन्हें कोड़ों से मारा गया, उनके ऊपर थूका गया, उनकी चमड़ी भी कई जगह से उधेड़ दी गयी, इसके बाद उनके सिंर पर नुकिले काटों का बना ताज पहनाया गया और कहा जाता है कि जिस क्रूस पर उन्हें लटकाया गया था उसे भी उन्हें ही घसीट कर पहाडी़ पर ले जाना पड़ा था। जिस दिन यीशु को सलीब पर चढ़ाया गया था वह शुक्रवार का दिन था जिसे ईसाई लोग गुड फ्राइडे के नाम से याद करते हैं। इतनी अमानवीय कृत्यो को सहते हुए भी ईसा मसीह ने ईश्वर से प्रार्थना की थी “हे ईश्वर इन्हें माफ़ कर देना यह खुद नही जानते हैं कि ये क्या कर रहे हैं?”

बाइबिल की मानें तो अपनी मृत्यु के तीसरे दिन यीशु पुनर्जीवित हो गयें थे जिसे ईसाई धर्म को मानने वाले ईस्टर के रूप मनाते है। इसके चालीस दिन यीशु स्वर्ग को चले गये थे। ईसा मसीह के बारह शिष्य थे जिनमें सबसे प्रिय शिष्य संतपाल एवं पीटर ने उनकी शिक्षाओं, उनके सिद्धांतों को जन-जन तक पहुचाने का कार्य किया।

# ईसाई धर्म के दस प्रतीक चिह्न

1- देव दूत
2- बेल यानि घंटी
3- सदाबहार का वृक्ष या क्रिसमस ट्री
4- उपहार
5- होली (holy)
6- पुष्पांजलि
7- मोमबत्ती
8- सेंटा क्लाज़
9- कैंडीकेन
10- तारा

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