क्रिसमस स्पेशल ! बहुत ही रोचक है क्रिसमस ट्री का इतिहास

क्रिसमस स्पेशल ! बहुत ही रोचक है क्रिसमस ट्री का इतिहास

स्पेशल डेस्क।
राजकुमार अश्क
तहलका 24×7
           भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है, यहाँ सभी धर्मों को समान अधिकार प्राप्त है सभी धर्मावलंबी अपनी आस्था के अनुसार अपने त्योहार को मना सकते हैं इसी प्रकार ईसाई धर्म में उनका सबसे महत्त्वपूर्ण त्योहार क्रिसमस होता है जो दिसम्बर माह की 25 तारीख को पूरी दुनिया में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन प्रभु यीशु का अवतरण धरती पर हुआ था और इसी दिन एक विशेष प्रकार के वृक्ष को भी सजाया जाता है जिसे क्रिसमस ट्री के नाम से जानते हैं। तो आइए… आज हम उसके इतिहास के बारे जानते हैं।

 

क्रिसमस के मौके पर जिस वृक्ष को सजाया जाता है वह सदाबहार फर, बालसम, या डगलश का एक बहुत ही खुबसूरत पौधा होता है। एक अनुमान के अनुसार इस वृक्ष को सजाने वाली प्रथा की शुरुआत प्राचीन काल में मिस्र वासियों ने की थी युरोप वासी भी सदाबहार के इस पौधे को सजाते है ऐसा माना जाता है कि यह वृक्ष सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है तथा इससे बुरी तरंगे दूर रहती है।
ऐसी भी मान्यता है कि यह वृक्ष स्वर्ग का वृक्ष माना जाता है, दुनिया के प्रथम मानव हव्वा को ईश्वर ने इस वृक्ष के फल को खाने के लिए मना किया था मगर वह माना नहीं और इसके फल को खा लिया जिस कारण इस वृक्ष की वृद्धि रूक गई मगर जब प्रभु यीशु का जन्म हुआ तो यह वृक्ष पुनः बढ़ने लगा। एक दूसरी मान्यता के अनुसार एक बुढियाँ ने अपने घर के आंगन में इसकी डाली को लगाया था जिस पर मकड़ियों ने जाला लगा दिया था मगर जब प्रभु यीशु का जन्म हुआ तो वह सब जाले सोने के तार में बदल गयें।

आधुनिक क्रिसमस ट्री की शुरुआत जर्मनी से हुई ऐसी भी मान्यता है। इस वृक्ष को आकर्षक बनाने के लिए इस पर रंगीन पत्तियों, कागजों, और लकड़ी के बने हुए विभिन्न आकार के छोटे छोटे त्रिकोने आकृति से सजाएँ जाने लगा। समय परिवर्तन के साथ साथ इसमें भी परिवर्तन करते हुए इस वृक्ष पर मोमबत्ती, टाफी, रिबन लगा कर इसे और भी खूबसूरत आकार दिया जाने लगा।1841 में इंग्लैंड में प्रिंस अलबर्ट ने पहला क्रिसमस ट्री लगाया था।

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