घनी आबादी में पटाखों की दुकानें दे रही अप्रिय घटना को दावत

घनी आबादी में पटाखों की दुकानें दे रही अप्रिय घटना को दावत

# पटाखों की दुकानों पर डंडा पटक कर पुलिस ने किया कोरम पूरा

जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
             दीपावली पर्व के नजदीक आते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया और पटाखों की दुकानों पर डंडा पटकना शुरू कर दिया परन्तु पुलिस की यह कार्यवाही बहुत ही शिथिल नजर आ रही है क्योंकि पुलिस के आने के पहले ही देर रात्रि को दुकानदारों द्वारा पटाखों की दुकानों से विस्फोटक सामग्री को हटा दिया गया था। पुलिस भी मौके पर पहुँच कर अपना कोरम पूर्ण कर वापस लौट गई।घनी आबादी में पटाखा बेचने से मना कर पाने में पुलिस अभी भी विफल साबित हो रही है। अभी भी दुकानदारों द्वारा सारे नियम कानून को ताक पर जौनपुर शहर मडियाहूं, मुंगरा बादशाहपुर, केराकत, बदलापुर जनपद में तमाम घनी आबादी वाले इलाके में बेधड़क पटाखों की दुकानें गुलजार हैं।

जौनपुर शहर की बात किया जाए तो चहारसू, खोआ मण्डी की गली में अवैध पटाखा बनाने व बेचने का काम धड़ल्ले से चल रहा है।शायद पुलिस भी किसी अप्रिय घटना के घटने की प्रतिक्षा कर रही है कि कोई अप्रिय घटना हो तब इन पटाखों के दुकानदारों पर अपना डंडा चलाए। इन सभी इलाकों में पटाखों के बेचने का लाइसेंस देते समय भी सभी नियमों कानूनों की पूरी तरह से अनदेखी की गई है, नियमत: देखा जाए तो पटाखों की बिक्री के लिए फायर ब्रिगेड की एनओसी का होना, बारूद रखने का लाईसेंस, दुकान के पास कम से कम दो बाल्टी पानी व एक बाल्टी बालू का होना अनिवार्य होता है मगर पानी और बालू रखकर स्थानीय प्रशासन द्वारा कोरम पूरा करके लाइसेंस दे दिया जाता है, जबकि जिला प्रशासन द्वारा दीपावली से एक दिन पूर्व यह सुनिश्चित किया जाता है कि पटाखों की दुकान ऐसी जगह पर लगनी चाहिए जहाँ पर आबादी न हो और जगह भी खुली रहे, मगर पटाखों के शौकीन और पटाखों को बनाने वाले दीपावली से पूर्व ही भारी मात्रा में बारूद और पटाखों को खरीद कर रख लेते हैं जिस कारण हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
वहीं दुकानदारों की मानें तो लाइसेंस लेने के लिए हम को पहले मोटी रकम देने के साथ साथ प्रत्येक अधिकारी को काफी मात्रा में पटाखों के रूप में चढ़ावा भी देना पड़ता है तब सम्बंधित अधिकारी द्वारा लाइसेंस मिलता है। ऐसे में अगर दुकानदारों की बात पर यकीन किया जाए तो उनकी बातों से साफ़ जाहिर होता है कि हादसों के लिए सिर्फ दुकानदार ही जिम्मेदार नहीं है बल्कि उस इलाके के प्रशासनिक अमला भी जिम्मेदार है।

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