जिन्ना के दादा मुसलमान नहीं थे, भारत की पहचान ऋषि-मुनियों से- आरिफ मोहम्मद खान

जिन्ना के दादा मुसलमान नहीं थे, भारत की पहचान ऋषि-मुनियों से- आरिफ मोहम्मद खान

# संस्कृति संसद में केरल के महामहिम राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने किया सम्बोधित

वाराणसी।
मनीष वर्मा
तहलका 24×7
                     अखिल भारतीय संत समिति और गंगा महासभा की ओर से वाराणसी में आयोजित संस्कृति संसद के दूसरे दिन केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने जिन्ना को लेकर बड़ा बयान दिया। 
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि ऋषियों ने आत्मा को संस्कृति से पहचानने का आधार बनाया। भारत की पहचान राजाओं से नहीं ऋषि-मुनियों से है। उन्होंने भारतीय संस्कृति को समृद्ध करने के लिए हजारों साल तक कठोर साधना की। उसका ही प्रतिफल है कि हमारी सनातन संस्कृति दुनिया की अकेली संस्कृति है जो पूरी दुनिया को मार्ग दिखाने की क्षमता रखती है। वहीं एक सवाल के जवाब में कहा कि जिन्ना के दादा मुसलमान नहीं थे और पिता भी पक्की उम्र में मुसलमान हुए। भारतीय संस्कृति इतनी समावेशी है जहां रावण के खिलाफ उसके दुष्ट व्यवहार के लिए कार्रवाई होती है। दुनिया ने इस संस्कृति को अपनी सोच के तौर पर नहीं, जरूरत के तौर पर स्वीकार किया।
भारत में सत्ता के लोगों को आधार नहीं बनाया गया, बल्कि ऋषि-मुनियों को आधार माना गया है। हमारा मानना है कि जीव में ही शंकर नजर आने चाहिए और मानव सेवा ही माधव सेवा है। आध्यात्मिक संस्कृति की ही देन है कि स्वामी विवेकानंद का सम्मान विदेशों में हुआ था। मोहम्मद साहब ने कहा था कि मैं मक्के में जरूर निवास करता हूं भारत नहीं गया, लेकिन भारत के इल्म की शीतल हवा यहीं से महसूस करता हूं। सत्र की अध्यक्षता अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष आचार्य अविचल दास तथा संचालन अशोक श्रीवास्तव ने किया। स्वागत सांसद रूपा गांगुली ने किया।
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