जीव जब माया का आश्रय लेता हैं तो बंधनो में बंध जाता है- डॉ रजनीकांत महाराज

जीव जब माया का आश्रय लेता हैं तो बंधनो में बंध जाता है- डॉ रजनीकांत महाराज

जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
                जीव जब माया का आश्रय लेता हैं तो बंधनो में बंध जाता हैं उक्त बाते प्रख्यात कथा वाचक डॉ रजनीकांत द्विवेदी ने नगर के शहाबुद्दीनपुर स्थित अनिल श्रीवास्तव एडवोकेट के आवास पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन अपने वाचन में कही।

उन्होंने ज्ञानयज्ञ में भक्तों को श्रवण कराया कि राम और कृष्ण में कोई अंतर नहीं हैं दोनों ईश्वर के परिपूर्णतम अवतार हैं, प्रभू श्रीराम ने अपने जीवन में जो आचरण किए मानव को उनका अनुसरण करना चाहिए परन्तु योगिराज श्रीकृष्ण ने जो अपने जीवनकाल में किया उसका चिंतन करना चाहिए।गोविन्द का सम्पूर्ण जीवन काल अनेकों संकटों से भरा था परन्तु सभी परिस्थितियों में उन्होंने सदैव प्रसन्न रहने का सिद्धांत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के पूर्व सुनील श्रीवास्तव, अश्वनी श्रीवास्तव अंशु, रामआसरे साहू ने कथा व्यास डॉ रजनीकांत द्विवेदी का माल्यार्पण कर स्वागत किया, कार्यक्रम का संचालन संजय श्रीवास्तव ने किया।

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