जौनपुर : अन्नदाताओं को दी गई धान उत्पादन की जानकारी

जौनपुर : अन्नदाताओं को दी गई धान उत्पादन की जानकारी

केराकत।
विनोद कुमार
तहलका 24×7
                स्थानीय क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र अमिहित में आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ नरेंद्र रघुवंशी ने खरीफ फसलों में धान ज्यादा से ज्यादा उत्पादन कैसे प्राप्त करें इस विषय मे किसानों को बताया गया।

डॉ नरेंद्र रघुवंशी ने बताया कि सर्वप्रथम किसान भाई सरकारी विभागों से ही बीज का क्रय करें। सरकारी विभागों से धान की बीज सिंचाई की सुविधा अनुसार यदि खरीदते हैं तो विभाग पर ही बीज की जिम्मेदारी होने के कारण किसानों को कभी भी धोखा नहीं होगा क्योंकि बीज की गारंटी रहती है, साथ ही सरकारी गोदामों पर शोधित बीज विक्रय हेतु आता है, सरकारी विभागों पर कैटेगरी के आधार पर आधारीय, प्रमाणित बीज आते हैं।

डॉक्टर नरेंद्र रघुवंशी ने बताया कि स्वस्थ एवं अच्छी नर्सरी पौध तैयार करने हेतु किसान भाई इस समय नॉटी मंसूरी एमटीयू -7029, नरेंद्र धान-2064, व 2065 कि यदि नर्सरी मई महीने के अंत तक डालते हैं तो 25 किलोग्राम बीज को, 45 लीटर पानी में 4 ग्राम स्ट्रिप्टो साइकिलीन अथवा 40 ग्राम प्लांटो माईसीन मिला कर बीज को रात भर पानी में डुबोकर रखें दूसरे दिन पानी से बीज निकालकर पानी को निथर जाने के पश्चात 50 ग्राम कार्बेंडाजिम को बीज में मिलाकर छाया में ढेर बना कर उस पर टाट अथवा जूट के बोरे को भिगोकर ढक दें और पानी का छींटा उस पर बराबर मारते रहे, लगभग 15 से 20 घंटे में धान का बीज अंकुरित हो जाएगा तब उसको तैयार किए गए नर्सरी खेत में अतार्थ लेव लगे खेत में शाम के समय छिटक दे।

ध्यान रहे खेत में तीन से चार सेंटीमीटर पानी अवश्य रहना चाहिएl केंद्र के प्रक्षेत्र प्रबंधक वी के सिंह ने बताया कि 1 एकड़ एरिया में रोपाई हेतु वहीं धान 10 किलोग्राम मध्यम धान 15 किलोग्राम और मोटा था 16 से 17 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से बीज की नर्सरी डालने के लिए प्रयाप्त होता है। बीज को कम से कम 10 से 12 घंटे तक पानी में भिगोकर वह उससे निकालकर ढेर बनाना चाहिए। केंद्र के शस्य वैज्ञानिक डॉक्टर एके सिंह ने बताया कि कम दिनों वाली प्रजाति है जैसे 110 से 115 दिन में पकने वाली प्रजातियों की नर्सरी मई माह में ना डालें। धान की सीधी बुवाई हेतु ड्रम सीडर से कम दिन वाली प्रजातियों का चयन कर किसान भाई कम लागत में और अधिक मुनाफा व उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
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