जौनपुर : “आपातकाल लोकतंत्र का एक काला अध्याय” पर वर्चुअल संगोष्ठी आयोजित

जौनपुर : “आपातकाल लोकतंत्र का एक काला अध्याय” पर वर्चुअल संगोष्ठी आयोजित

जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
               भारतीय जनता पार्टी के कैम्प कार्यालय पर मुंगरा बादशाहपुर विधानसभा के प्रभारी आरपी कुशवाहा की अध्यक्षता में “आपातकाल लोकतंत्र का एक काला अध्याय” पर वर्चुअल विचार गोष्ठी आयोजित हुई।

वर्चुअल गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए जौनपुर के जिला प्रभारी एवं पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश त्रिवेदी ने कहा कि भारत के इतिहास में आज ही के दिन 25 जून 1975 में देशभर में आपातकाल लगाने की घोषणा की गई थी यह आदेश देश में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर किये गये थे जिसने कई ऐतिहासिक घटनाओं को जन्म दिया भारतीय राजनीति के इतिहास में यह सबसे विवादस्पद काल रहा क्योंकि आपातकाल में भारत में चुनाव स्थगित हो गए थे और भारत में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक की 21 महीने की अवधि का आपातकाल था।

उन्होंने आगे कहा कि 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार की सिफारिश पर तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने आपातकाल की घोषणा की थी यह घोषणा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के अंतर्गत की गई थी। उस वक्त इंदिरा गांधी ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले हर शख्स को जेल में बंद करवा दिया था।

मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व जिलाध्यक्ष हरिश्चंद्र सिंह ने कहा कि देश में आपातकाल के बाद पूरा देश इंदिरा गांधी और संजय गांधी का बंधक बन गया था, आपातकाल लगते ही इंदिरा के कड़े विरोधी माने जा रहे जयप्रकाश नारायण को 26 जून की रात डेढ़ बजे गिरफ्तार कर लिया गया था उनके साथ इंदिरा की नीतियों का विरोध कर रहे कई और नेताओं को भी गिरफ्तार कर लिया गया और देश भर की कई जेलों में डाल दिया गया।

इसी कड़ी में वक्ता के रूप में किसान मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य विनय सिंह ने कहा कि देश भर में आपातकाल लगाए जाने के बाद मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट यानी मीसा के तहत हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उस समय लालू यादव भी जेल में रहे और जब वो जेल में बन्द थे तो उसी समय उनकी पुत्री पैदा हुई जिसका नाम मीसा रखे है।

अध्यक्षीय भाषण देते हुए आरपी कुशवाहा ने कहा कि आपातकाल की घोषणा के साथ ही सभी नागरिकों के मौलिक अधिकार खत्म कर दिए गए थे और कई मनमाने फैसले लिए गए थे इसमें ही एक फैसला था संसद और विधानसभा का कार्यकाल 6 साल करने का फैसला था आपको जानकर हैरानी होगी कि इंदिरा गांधी का यह फैसला 2019 तक जिस प्रदेश में लागू था उसका नाम जम्मू-कश्मीर है, जहां 1975 से विधानसभा का कार्यकाल छह साल का चला आ रहा था लेकिन 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिलने के बाद अब इतिहास का हिस्सा बनकर रह गई।

कार्यक्रम की संयोजक जिला उपाध्यक्ष किरण श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी की समापन की घोषणा की। कार्यक्रम का संचालन जिला उपाध्यक्ष अमित श्रीवास्तव ने किया। संगोष्ठी की समाप्ति के उपरांत मुख्य अतिथि राकेश त्रिवेदी जी ने लोकतंत्र सेनानियों के घर-घर जाकर हरीशचंद्र श्रीवास्तव, सुभाष गुप्ता, रामेश्वर सिंह, प्रमोद प्रजापति एवं पूर्व विधायक सुरेंद्र प्रताप सिंह को अंग वस्त्र और माला पहनाकर सम्मानित किया। उक्त अवसर पर रविन्द्र सिंह राजू दादा, आमोद सिंह, अनिल गुप्ता, रोहन सिंह, प्रमोद प्रजापति आदि उपस्थित रहें।
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