जौनपुर : कोरोना पर आस्था पड़ा भारी, लोग सुबह से कर रहे दर्शन पूजन

जौनपुर : कोरोना पर आस्था पड़ा भारी, लोग सुबह से कर रहे दर्शन पूजन

# शक्तिपीठ मां शीतला धाम चौकिया में उमड़ी दर्शनार्थियों की भारी भीड़

# नहीं कराया जा रहा दो गज की दूरी का पालन

जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
                  मंगलवार को नवरात्र शुरू होते ही हर जगह माता के दर्शन को श्रद्धालूओं की भीड़ उमड़ पड़ी है लेकिन जौनपुर में नवरात्र के दिन का खास महत्व होता है। यहां स्थित माता शीतला चैकिया का दर्शन पूर्वांचल के लोंगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। कोरोना काल मे भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नवरात्र में माता के दर्शन के लिये पौराणिक शीतला माता चैकियां में उमड़ रही है। माता रानी के दर्शन के लिए कहीं किसी प्रकार की किसी से दो गज की दूरी का पालन नहीं कराया जा रहा है नहीं मंदिर परिसर में, नहीं थर्मल स्क्रीनिंग या सेनेटाइजर की व्यवस्था की गई है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि लोगों के ऊपर करोना का डर नहीं बल्कि आस्था भारी दिखाई दे रही है।

यहाँ मान्यता है कि किसी को माँ विन्ध्यवासिनी का दर्शन करना है तो उसके पहले माँ शीतला का दर्शन जरूरी है उसके बाद ही माँ विन्ध्यवासिनी के दर्शन का महत्व है। लोगों की आस्था इस बात से भी देखी जा सकती है कि दिल्ली, मुम्बई जैसी जगहों से यहां माँ के दर्शन को खिंचे चले आते हैं। पूर्वांचल के लोगो की आस्था का केंद्र माँ शीतला चौकिया धाम में यू तो हर समय दर्शनार्थियों का आना जाना लगा रहता है लेकिन नवरात्र के अवसर पर यहाँ हजारो की संख्या में लोग अपनी मनोकामना लेकर माता के दर्शन को आते है। लोगो की मान्यता है की माता शीतला का दर्शन करने के बाद ही माँ विन्ध्यवासिनी का दर्शन किया जाता है।

मंगलवार सुबह से ही भक्तों का सैलाब लाइन लगाकर माँ शीतला चैकिया की एक झलक पाने के लिए लोग लालायित दिखे। माँ शीतला के भक्तों की श्रद्धा यहा तक है कि वे अपने बच्चों के मुन्डन संस्कार के लिए दिल्ली मुम्बई कोलकाता आदि शहरों में बसे लोग खिंचे चले आते हैं। माता शीतला की महिमा से हर किसी को इतनी श्रद्धा है कि यहां खड़ा हर श्रद्धालू अपनी-अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए हाथ जोड़ घंटों बैठे प्रार्थना करता रहता है। माता के दर्शन को आने वालों का विश्वास इतना अटल है कि उनको पता है यहां आने का मतलब हर मनाकामना की पूर्ति होना है।हजारो साल पुराने इस पौराणिक मंदिर में हर साल हजारो की संख्या में श्रद्धालु आते है और माता के दरबार में कढ़ाई चढ़ाते है और बच्चो का मुंडन संस्कार भी कराते है।

ऐसी मान्यता है कि मंदिर के पास बने तालाब में नहाने से कुष्ट जैसे रोग से छुटकारा मिल जाता है अगर आपको माँ विन्ध्यवासिनी, मैहरमाता, वैष्णो माता, कड़े मानिकपुर माता के दर्शन को जाना हो तो उससे पहले जौनपुर की माता शीतला चैकिया के दर्शन जरुरी है। माता के दर्शन कर लेने के बाद श्रद्धालुओं की आगे की यात्रा के सफल होने की गारन्टी हो जाती है। इसीलिए वाराणसी, सोनभद्र, बलिया, आजमगढ़, गाजीपुर, गोरखपुर जैसे पूर्वांचल के जिले से श्रद्धालू जब माँ विन्ध्यवासिनी के दर्शन को निकलते हैं तो पहले माता शीतला के दर्शन कर के ही अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं।

मोहन पंडा ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा पूरी तरह से शीतला धाम चौकिया में व्यवस्था की गई है पुलिस प्रशासन फायर ब्रिगेड की गाड़ियां महिला पुलिस भी लगाया गया है। माता शीतला की बड़ी महानता है। यहां तरह-तरह के कर्मकांड किए जाते हैं। कढ़ाई चढ़ाना भेड़ा चढ़ाना नारियल फूल चुनरी जाफर आदि चढ़ाया जाता है। इसका बहुत ही महत्त्व है जिलाधिकारी द्वारा एक बार में 4 से 5 लोगों को ही दर्शन करने की इजाजत दी गई है। बाकी लोग झांकी दर्शन कर रहे हैं। माता की सवारी गधा है और झाड़ू लेकर चलती हैं। यहां पर इलाहाबाद आजमगढ़ अंबेडकर नगर मऊ जौनपुर आदि पूर्वांचल के जिलों के लोग दर्शन के लिए आते हैं। जो भी लोग यहां कोई मन्नत मांगते हो जरूर पूरी होती है।

वहीं शिव कुमार पंडा का कहना है कि आस्था का जनसैलाब उमड़ा हुआ है लोग सुबह 5 बजे से ही लाइन लगाकर माता का दर्शन कर रहे हैं ऐसा माना जाता है कि माता सात बहने हैं और यह सबसे छोटी है साथ ही यह कुंवारी माता भी हैं। सभी बहनों की इनके ऊपर छाया रहती है इससे वह भी कहीं दर्शन करने जाना हो चाहे कड़े जाना हो विंध्याचल जाना हो मैहर माता जाना हो बिना इनकी पूजा किए दर्शन किया लोगों का आगे जाना सफल नहीं होता है इसलिए लोग पहले इनका पूजा करके आगे जाते हैं।

वहीं दूसरी तरफ मंदिर के ही पंडा आशीष माली का कहना है कि सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा रही है कहीं कोई दूरी नहीं है कोई व्यवस्था नहीं की गई है। कोविड-19 का सही ढंग से पालन नहीं कराया जा रहा है पहले अपने घर से निकलते थे चल के शक्तिपीठ मां शीतला धाम का दर्शन करेंगे आज उन्हें बाहर से ही झांकी दर्शन कराया जा रहा है इसलिए वह उत्साह नहीं है।नवरात्र के दिनों में तो पूजा-पाठ और व्रत का खास महत्व है ही लेकिन माँ शीतला के दर्शन के बिना जौनपुर और दूर-दराज के जिलों के श्रद्धालू अपनी भक्ति को पूर्ण नहीं पाते है।
Apr 13, 2021

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