जौनपुर : नमामि गंगे योजना एंव अमृत योजना के तहत कराए जा रहे विकास कार्य भ्रष्टाचार के आकंठ में

जौनपुर : नमामि गंगे योजना एंव अमृत योजना के तहत कराए जा रहे विकास कार्य भ्रष्टाचार के आकंठ में

जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
               नमामि गंगे योजना के तहत बन रहे बेहद कम क्षमता के एसटीपी व अमृत योजना के तहत डाले जा रहे सीवर के कार्य में वित्तीय व तकनीकी भ्रष्टाचार की बात स्वच्छ गोमती अभियान द्वारा प्रारम्भ से ही उठाई जा रही है, संस्था को उत्तर प्रदेश की ईमानदार योगी सरकार की माँ गोमती की स्वछता के प्रति कर्तव्यनिष्ठता पर पूर्ण विश्वास है इसीलिए विभिन्न मौकों पर स्वच्छ गोमती अभियान द्वारा प्रत्येक बार जलनिगम, कार्यदायी फर्म व उनके संरक्षणदाताओं द्वारा किये गए भ्रष्टाचार से सरकार, ज़िला प्रशासन व आम जनमानस को पत्र व मीडिया के माध्यम से अवगत भी कराया गया है।
भ्रष्टाचार के इसी क्रम में जलनिगम के उच्चाधिकारियों क्रमशः मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, कार्यदायी फर्म व इन सभी के प्रभावशाली संरक्षणदाताओं की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का एक और बड़ा भ्रष्टाचार कर लिया गया। गत 30 दिसम्बर 2020 को मुख्य अभियंता द्वारा जौनपुर में एसटीपी कार्य में हो रही देरी को देखते हुए कार्यदायी फर्म पर 65,840 रुपये प्रतिदिन (लगभग 19.5 लाख रुपये प्रतिमाह) के हिसाब से पेनाल्टी तय की गई, जिसे तब तक चलना था जब तक कि कार्यदायी फर्म द्वारा तय की गई सीमा के भीतर विभाग द्वारा अपेक्षित कार्य की गति व प्रतिशत न प्राप्त कर लिया जाए, इसी दौरान विगत 28 फरवरी को मीडिया को दिए गए एक बयान में अधिशासी अभियंता जलनिगम द्वारा बताया गया कि फरवरी के अंत मे कार्यदायी फर्म को 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण करना था लेकिन वह अब तक केवल 20 प्रतिशत कार्य ही पूर्ण कर सकी है।

वर्तमान अगस्त माह में भी फर्म द्वारा अब तक अपेक्षित कार्य की गति व प्रतिशत नहीं प्राप्त किया गया है, किन्तु विभाग द्वारा फर्म को किये गए छठवें बिल (22- फरवरी 21) के भुगतान में मात्र 15 दिन की पेनाल्टी 9,87,600 रुपये ही काटे गए और सबको बताया गया कि धीरे धीरे यह पेनाल्टी प्रत्येक बिल से काटी जाएगी, जबकि फरवरी माह के भुगतान में ही फर्म के बिल से 48 दिन की पेनाल्टी लगभग (38 लाख रुपये) काटने थे। इसी क्रम में फर्म को किये गए अगले बिल के भुगतान गत 24 मई 21 में कार्यदायी फर्म की पेनाल्टी शून्य कर दी गयी जबकि अब तक फर्म पर जनहित में कार्य को देरी से करने के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की पेनाल्टी लग जानी चाहिए थी।
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