जौनपुर : प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने लिया पत्रकार उत्पीड़न का संज्ञान

जौनपुर : प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने लिया पत्रकार उत्पीड़न का संज्ञान

जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
              जनपद में तेजतर्रार कहे जाने वाले एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पुलिस अधीक्षक अजय साहनी के कार्यकाल में टाप क्लास के शार्प शूटरों की भरमार नजर आने लगी जो न सिर्फ रात के भीषण अंधेरे में सटीक निशानेबाजी करते हुए आरोपियों को मार गिराने में दक्ष नज़र आते है बल्कि दिन के उजालों में भी खाकी के नाम पर कहर बरपाकर बेबस, लाचार, इज्ज़तदारों के साथ साथ वकील और पत्रकार को भी अपना निशाना बनाते हुए मुठभेड़ को आतुर नज़र आते है।इसी कड़ी में खबरों से आहत होकर हौसलों से लबरेज तत्कालीन शहर कोतवाल संजीव कुमार मिश्रा द्वारा पूरे गैंग के साथ गत 4 जुलाई 2021 को प्रेस कार्यालय का दरवाजा तोड़कर संपादक तथा परिजनों को बंधक बनाकर ऑफिस तथा घर में दिनदहाड़े डांका डाला। आरोपी हौसला बुलंद पुलिसकर्मियों के खिलाफ दिए गए प्रार्थना पत्र पर संज्ञान लेते हुए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने विधिक कार्यवाही शुरू कर दिया है।
जनपद में लाइन बाजार थाना अंतर्गत हुई करोड़ों की डकैती में मददगार तथा सरायख्वाजा थाना क्षेत्र में अग्निकांड को बढ़ावा दे चुके तेजतर्रार पूर्व शहर कोतवाल संजीव कुमार मिश्रा तथा 5 अन्य चौकी प्रभारी क्रमशः शैलेंद्र पांडे, संतोष पाठक, विवेक तिवारी, तारा यादव एवं चंदन राय तथा दर्जनों से अधिक पुलिसकर्मियों ने एसपी सिटी डॉक्टर संजय कुमार तथा सीओ सिटी जितेंद्र दुबे के कुशल नेतृत्व में लाल फीताशाही को बढ़ावा देते हुए वर्दी की आड़ में दरिंदगी की हद को पार करते हुए पुलिस अधीक्षक का फरमान बताकर 4 जुलाई 2021 को शाम 5:30 बजे बलोचटोला स्थित प्रीत टाइम्स के प्रेस कार्यालय का दरवाजा तोड़ते हुए लूटपाट किया तथा संपादक और उनके परिजनों को बंधक बनाकर घर पर डाका डाला। जहां से नगदी सहित साढ़े तीन लाख के आभूषणों पर हाथ साफ करते हुए घर तथा प्रेस कार्यालय में लगे सीसीटीवी डीवीआर नोच लिया गया।

मामला पुलिस प्रमुख आईजी ज़ोन वाराणसी एसके भगत के खिलाफ छापी गई खबर बाहुबली का यार बना मददगार बताया गया। अधीक्षक की चुस्ती और दुरूस्ती का हवाला देकर संपादक के साथ फर्जी पुलिस मुठभेड़ की मनसा में सम्पादक के पैर से बह रहा खून तथा वायरल हो चुके लाइव फेसबुक से लाचार होकर अपने जुनून संग अपनी छाती पीटती पुलिस के द्वारा जबरन प्रेस कार्य में बाधा डालते हुए खबरों को वेब पोर्टल से डिलीट किया गया तथा पुलिसिया उत्पीड़न के पश्चात जबरन सादे कागज पर दस्तखत करवाने के बाद लिखित कार्यवाही करने पर जानमाल की धमकी देकर संपादक को छोड़ा गया। इतना ही नहीं अपराध की पराकाष्ठा लांघ चुके पुलिसकर्मियों के सहयोग तथा उच्च अधिकारियों के सम्मान में पुलिस अधीक्षक ने संपादक के खिलाफ गुंडा एक्ट की नोटिस भी जारी करवा दिया।प्रार्थी ने प्रकरण की लिखित शिकायत उच्च अधिकारियों के साथ-साथ प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से भी किया जिस पर संज्ञान लेते हुए आरोपी उदंड, उपद्रवी, दबंग अपराधी प्रवृत्ति के पुलिसकर्मियों के खिलाफ विधिक कार्यवाही करते हुए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने समस्त साक्ष्यों का आंकलन और संकलन शुरू किया। जिसे लेकर निष्पक्ष और बेबाक पत्रकारिता जगत में हर्ष का माहौल व्याप्त नजर आता है।

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