जौनपुर : लगातार दूसरी बार भी नहीं अदा हो सकी शाही ईदगाह मे ईद-उल-अजहा की नमाज़

जौनपुर : लगातार दूसरी बार भी नहीं अदा हो सकी शाही ईदगाह मे ईद-उल-अजहा की नमाज़

जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
              कोविड-19 की तीसरी लहर के मद्देनजर आज लगातार दूसरे वर्ष भी शाही ईदगाह मे ईद-उल-अजहा की नमाज़ सामुहिक रूप में अदा नहीं हो सकी। हालांकि साफ सफाई व रंगाई पुताई का काम शाही ईदगाह मे पूर्ण हो चुका था।
बताते चलें कि बादशाह अकबर के निर्देशन में 16वीं सदी में शाही ईदगाह की तामिर हुई थी। यह पूर्वांचल ही नहीं बल्कि क्षेत्रफल की दृष्टि से उप्र की दूसरी सबसे बड़ी ईदगाह है जिसमें एक साथ लगभग एक लाख लोग नमाज अदा कर सकते है। इस मौके पर ईदगाह के मीडिया प्रवक्ता रियाजुल हक ने बताया कि यह ईद-उल-अजहा आज से लगभग 4 हजार वर्ष पूर्व हजरत इब्राहीम अ. स. के बेटे हजरत इस्माइल अ. स. की याद में मनाई जाती है।
इब्राहीम अ. स. अल्लाह के पैगम्बर थे और उनकों बुढ़ापे में एक औलाद हुई जो बहुत मन्नत व मुराद की थी वह उनको बहुत अजीज थी तो अल्लाह उनके दिल को देखना चाहते थे कि क्या यह खुदा की राह में अपनी सबसे चहेती चीज की कुर्बानी दे सकते है तो उन्होंने अपने बेटे को कुर्बान करना चाहा पर जैसे ही छुरी उनके गर्दन पर चली तो फरिश्तों ने वहां एक दुम्बा रख दिया तब से यह परम्परा शुरू हो गई। इस्लाम में अपनी जान माल, सब-कुछ जब जरूरत पड़ जाए तो खुदा की राह, इन्सानियत की राह मे कुर्बान करने मे एक मोमिन को हिचकना नहीं चाहिए और मानवता के लिए अपने अंदर के अहम को कुर्बान करके लोगो को विनम्र बनना चाहिए।यही ईद-उल-अजहा का पैगाम है।
Previous articleजौनपुर : आरपीएफ ने छापेमारी कर टिकट दलाल को किया गिरफ्तार
Next articleजौनपुर : पत्रकार को पितृशोक, पत्रकारिता जगत समेत क्षेत्र में शोक की लहर
तहलका24x7 की मुहिम... "सांसे हो रही है कम, आओ मिलकर पेड़ लगाएं हम" से जुड़े और पर्यावरण संतुलन के लिए एक पौधा अवश्य लगाएं..... 🙏