जौनपुर : शिक्षक अच्छे संस्कारों और ज्ञान का करते हैं सृजन- डॉ विनोद कुमार

जौनपुर : शिक्षक अच्छे संस्कारों और ज्ञान का करते हैं सृजन- डॉ विनोद कुमार

जलालपुर।
प्रियंका श्रीवास्तव
तहलका 24×7
                क्षेत्र के बाबू बैजनाथ प्रसाद शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान एवं आशीर्वाद नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कालेज छितौना दूबेपुर में रविवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर अवकाश प्राप्त एवं वर्तमान शिक्षकों को स्मृतिचिन्ह व अंगवस्त्रम देकर मुख्य अतिथि संस्थान के संस्थापक व चेयरमैन डॉ विनोद कुमार कन्नौजिया ने स्वागत किया।इस दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने शिष्यों के हृदय में अच्छे संस्कारों और ज्ञान का सृजन करता है और कुप्रवृतियों का नाश करता है इसलिए वह भगवान के समान पूजनीय और वंदनीय है।आज के दिन राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिवस है। राधाकृष्णन ने चालीस वर्षों तक शिक्षण कार्य किया था।

वह महान शिक्षक तो थे ही साथ में शिक्षक और छात्रों के उत्तम समन्वयक भी थे। उन्होंने अपने जन्म दिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा व्यक्त की थी, जिसका उद्देश्य शिक्षकों को सम्मान दिलाना था।इससे पूर्व समारोह को पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजेश यादव, शेषनाथ मिश्र, डॉ सुनील कन्नौजिया, दिनेश सिंह, मुकेश यादव, मो सलीम आदि ने सम्बोधित किया। समारोह में अवकाश प्राप्त शिक्षक बुल्लूर यादव, शशिकला दुबे, केवला देवी, शमशेर यादव, गिरजा देवी, गीता देवी, डॉ विजय कुमार मौर्य तथा कार्यरत शिक्षक डॉ सुनील कन्नौजिया, डॉ गिरीश कुमार सिंह, डॉ बिरेन्द्र कुमार मौर्य, रत्नाकर मिश्र, अरुण मिश्र, पवन सिंह, मो इमरान, मो जुबैर, रविन्द्र सिंह, आनन्द यादव को स्मृतिचिन्ह एंव अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया गया।

अतिथियों का स्वागत राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित मो असलम ने किया। सरस्वती वन्दन एवं स्वागत गीत रोशनी व बविता ने प्रस्तुत किया।अध्यक्षता अतुल प्रकाश यादव व संचालन ओमप्रकाश चक्रवर्ती ने किया। इस मौके पर बाल कृष्ण आनन्द, एजाज अहमद, अनिल कुमार, रतनलाल मौर्य आदि मौजूद रहे। इसी क्रम में बयालसी इंटर कालेज जलालपुर में अवकाश प्राप्त शिक्षक अरविंद सिंह का प्रधानाचार्य डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह ने अंगवस्त्रम, गीता पुस्तक व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राधा कृष्णन शिक्षा और शिक्षक जगत के मसीहा थे। उनके विचार थे कि यदि देश का प्रत्येक शिक्षक अपने धर्म का पालन करे तो पूरा देश अशिक्षा और अज्ञान से मुक्त हो जाएगा। वर्तमान में गुरु-शिष्य परंपरा का स्वरूप काफी बदला है। इंटरनेट का जमाना आ गया है ऑनलाइन पढ़ाई भी विद्यार्थियों को प्रदान की जा रही है और ई-लर्निंग में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे विद्यार्थियों को हो रहा है।
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