जौनपुर : सेनापुर शहीद स्तम्भ पर फहरा रहा है फटा हुआ राष्ट्रीय ध्वज

जौनपुर : सेनापुर शहीद स्तम्भ पर फहरा रहा है फटा हुआ राष्ट्रीय ध्वज

# हो रहा है राष्ट्रीय ध्वज का अपमान, देश का अपमान, प्रशासन बेखबर

केराकत।
विनोद कुमार
तहलका 24×7
                   राष्ट्रीय ध्वज भारत के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है यह हमारे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। राष्ट्रीय ध्वज के लिए सभी के मन मे प्रेम, आदर और निष्ठा है जब भी लहराते हुए ध्वज के सामने राष्ट्रगीत गाया जाता हैं तो जोश से रोंगटे खड़े हो जाते हैं और बाज़ुओं का खून गर्म हो जाता है और शरीर का रोम रोम देश भक्ति में सराबोर हो जाता है। देश में अगर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान होता हैं तो देश का अपमान होता हैं राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का एक मामला प्रकाश में आया है।
जनपद मुख्यालय से 36 किलोमीटर दूर केराकत तहसील के सेनापुर गॉव में 1857 भारत की पहली गदर क्रांति के क्रांतिकारियों के याद में बनाये शहीद स्मारक के प्रांगण में 162 साल बाद शहीदों के सम्मान में 51 फुट ऊंचा तिरंगा झंडा गणतंत्र दिवस के पूर्व संध्या पर फहराया गया लेकिन अब शहीद स्तम्भ लगा हुआ राष्ट्रीय ध्वज फट गया है। फटे राष्ट्रीय ध्वज के फहराने से देश का अपमान, राष्ट्रीय ध्वज का अपमान हो रहा है।

बताते चले कि राष्ट्रीय ध्वज को लगे तकरीबन 11माह हो गया है यह दूसरी बार है जब राष्ट्रीय ध्वज फटा है। पहली बार फटे हुए राष्ट्रीय ध्वज की जगह पूर्व ग्राम प्रधान रमेश कुमार ने नए राष्ट्रीय ध्वज शहीद स्तम्भ पर फहराया उस वक्त भी फटे हुए ध्वज से प्रशासन बेख़बर था और आज भी शहीद स्तम्भ पर फटा हुआ राष्ट्रीय ध्वज फहर रहा है जिससे प्रशासन बेखबर है।
इस बाबत जब ग्राम प्रधान अरविंद चौहान से बात की गई तो उन्होंने बताया कि शहीद स्तम्भ पर फटा हुआ राष्ट्रीय ध्वज फहर रहा है जिसे देखकर पीड़ा होती हैं राष्ट्रीय ध्वज के लिए जौनपुर, लखनऊ व वाराणसी तक पता किया मगर कहीं से भी यह पता नहीं लग सका कि राष्ट्रीय ध्वज कहाँ मिलेगा। क्योंकि राष्ट्रीय ध्वज 51 फुट ऊंचा है और ध्वज का आकार भी काफी बड़ा है। फिलहाल वाराणसी के एक टेलर से ध्वज सिलवाने की बात चल रही है।
एक सवाल जो हर भारतीय देश के उच्चाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों से करना चाहता है कि क्या सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी के भाषण तक ही राष्ट्रभक्ति सीमित रह गयी है। आखिर कब तक देश मे बने शहीद स्मारकों/स्तम्भों व राष्ट्रीय ध्वज का अपमान होता रहेगा? आख़िर कब उच्चाधिकारियों एंव जनप्रतिनिधियों का रवैया शहीद स्तम्भों व राष्ट्रीय ध्वज के प्रति संवेदनशील होगा। बहरहाल फटे हुए राष्ट्रीय ध्वज को कब और कैसे बदला जायेगा ये तो मूल प्रश्न है?

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