जौनपुर : स्पेशल पॉक्सो एक्ट 2012 भुक्तभोगी बच्चों के लिए है बहुत प्रभावी- अतुल श्रीवास्तव

जौनपुर : स्पेशल पॉक्सो एक्ट 2012 भुक्तभोगी बच्चों के लिए है बहुत प्रभावी- अतुल श्रीवास्तव

# पाक्सो एक्ट एंव स्पेशल पाक्सो एक्ट 2012 जागरूकता कार्यशाला आयोजित

# सरजू प्रसाद शैक्षिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में सम्पन्न हुई कार्यशाला

जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
                  सरजू प्रसाद शैक्षिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था जज कॉलोनी जौनपुर के तत्वाधान में “पॉक्सो एक्ट” पर कार्यशाला आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि जिला प्रोबेशन अधिकारी अभय कुमार ने कहा कि बालकों के लैंगिक शोषण और लैंगिक दुरुपयोग जघन्य अपराध है कोई गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमले कारित करेगा वह कठोर कारावास से जिसकी अवधि 10 वर्ष से कम नहीं होगी किंतु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दंडनीय होगा। ऐसे मामलों के लिए स्पेशल कोर्ट की स्थापना की गई है विशेष यह धारा न्यायालय के समक्ष कार्रवाईयों को दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के अनुसार लागू होने का उपबंध करती है।
विशेष न्यायालय विचारण के दौरान आक्रामक या बालक के चरित्र हनन संबंधित प्रश्न पूछने के लिए अनुज्ञात नहीं करेगा और यह सुनिश्चित करेगा सभी समय बालक की गरिमा बनाए रखी जाए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मध्यस्था अधिकारी डॉ दिलीप सिंह ने कहा कि भुक्तभोगी का बयान मजिस्ट्रेट के सामने कराए जाने की बाध्यता है और उसकी एक समय सीमा है। ऐसे प्रताड़ित लोगों को न्याय मित्र अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाना चाहिए थाने में मुकदमा दर्ज करने के पहले ही ताकि पीड़िता की मदद हो सके ऐसा करना चाहिए ऐसा पॉक्सो एक्ट में प्रावधान है।
अतुल श्रीवास्तव प्रथम अधिवक्ता पाक्सो एडीजीसी क्रिमिनल ने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान मैंने सैकड़ों जमानतें खारिज कराई और सैकड़ों मुकदमे में सजा कराई जिसमें सबसे ज्यादा उल्लेखनीय है जिसमें दो ऐसे मुकदमे जिसमें समस्त गवाह होस्टाइल हो गए थे उसके बाद भी अभियुक्तगण को आजीवन कारावास कराया। जिसके संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुझे दो- दो बार प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। राष्ट्रपति के अनुमोदन के पश्चात यह स्पेशल पॉक्सो एक्ट 19 जून 2012 को वजूद में आया। यह पॉक्सो एक्ट 18 साल से कम बालकों के प्रोटेक्शन के लिए बना हुआ है और इसमें आम तौर पर पीड़ित व्यक्ति के नाम गुप्त रखा जाता है जो नाम खोलेगा उसको सजा का प्रावधान है यह एक्ट इतना प्रभावी है कि इसका ट्रायल बहुत जल्द शीघ्र निस्तारित किया जाता है माननीय न्यायालय के द्वारा अतिशीघ्र फैसला किया जाता है।
पूर्व शासकीय अधिवक्ता क्रिमिनल मनोज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि ट्रायल में सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर है कि अदालत में एक पर्दा हो जिससे कि भुक्तभोगी मुलजिम अधिवक्ता का चेहरा न देख सके लेकिन दुर्भाग्य है उत्तर प्रदेश की अदालतों में ऐसी व्यवस्था नहीं है शासन न्यायालय को ऐसी व्यवस्था के लिए ध्यान देने व अनुपालन कराए जाने की जरूरत है और जब ट्रायल हो तो किसी भी आदमी को अदालत में अंदर जाने की व्यवस्था नहीं है। बाल संरक्षण अधिकारी चंदन राय संचालन करते हुए कहा कि यदि किसी भागी हुई लड़की को पुलिस ने बरामद किया है जिसका दैहिक शोषण भी हुआ है कानून कहता है कि थाने में ऐसी बालिका को नहीं रखा जाएगा क्योंकि ऐसे में पुलिस उसे बयान बदलने के लिए दबाव बनाती है।
वहीं मनोवैज्ञानिक डॉ आरएन सिंह ने कहा कि पॉक्सो एक्ट से संबंधित बच्चों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण साइलाजिकल गाइडेंस अत्यंत जरूरी है ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा में समायोजित किया जा सके। उक्त अवसर पर डॉ मनोज वत्स, सीमा सिंह, शैलेंद्र निषाद, राजमणि, शिव शंकर चौरसिया, शोभना स्मृति, फूलचंद भारती, डॉ सुधा सिंह, आशुतोष सिंह, मुन्नी बेगम, विनोद कुमार मिश्रा, रवि सिंह, वीरेंद्र पांडे, प्रवीण शुक्ला समन्वयक मनोज कुमार पाल इत्यादि लोग प्रमुख रूप से उपस्थित थे। अंत में कार्यक्रम आयोजक संजय उपाध्याय एक्स चेयरमैन चाइल्ड वेलफेयर कमेटी संस्था सचिव ने आए हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
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