धरोहरों का डाटाबेस बनने से देश को लाभ- प्रो. रामलखन सिंह

धरोहरों का डाटाबेस बनने से देश को लाभ- प्रो. रामलखन सिंह

# कौतूहल और जिज्ञासा से परिपूर्ण होता है मानव- प्रो. निर्मला एस.मौर्य

# आईपीआर की तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ

जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
                  वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट सेल (आईपीआर) के तत्वावधान में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन सत्र शुक्रवार को ऑनलाइन किया गया। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि मानव जीवन कौतूहल और जिज्ञासा से परिपूर्ण होता है। आवश्यकता आविष्कार की जननी है। आप क्या कर रहे हैं, आप क्या खोज रहे हैं वह कैसे सुरक्षित रहेगा। इसी को संरक्षित और सुरक्षित करने का मंच है आईपीआर सेल.. उन्होंने कहा कि भारत इस मामले में अपने प्रबंधन के प्रति गंभीर है। इसी के चलते हम विश्व में 40वें स्थान पर हैं।

बतौर मुख्य अतिथि नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय पलामू झारखंड के कुलपति प्रो. रामलखन सिंह ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार के मामले में हम 21वीं सदी में जागरुक हुए। नीम, हल्दी की लड़ाई देश ने लड़ी। हमने अपनी धरोहर, मेडिसिन, प्लांट का डाटाबेस बनाना शुरू कर दिया। इससे यह पता चलता है कि इस पर किसी ने काम करना‌ तो शुरू नहीं कर दिया। उन्होंने कहा कि आईपीआर का विषय सामयिक है। हम पीजी और पीएचडी के विद्यार्थियों को सुविधा देकर इस कार्य को आगे बढ़ा सकते हैं।
मुख्य वक्ता साइंस और टेक्नोलॉजी मंत्रालय के वैज्ञानिक डॉ अखिलेश मिश्र ने कहा कि आज साइंस को सोसाइटी से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मार्केट के हिसाब से टेक्नोलॉजी होनी चाहिए और इनोवेशन के कारण ही हम बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि साइंस पब्लिकेशन के मामले में हम विश्व में तीसरे स्थान पर हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में छात्रवृत्ति की राशि बढ़ाकर और रिसर्च कार्य को गुणवत्ता पूर्ण बनाकर हम चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
इस अवसर पर बतौर वक्ता बायोनेस्ट बीएचयू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी साईंकेत सेन ने कहा कि हम हमेशा एक बॉक्स के बाहर सोचता है वही इनोवेशन कर सकता है। विश्व स्तरीय शोध से लिए गए डाटा का जिक्र करते हुए बताया कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है इनोवेटिव आइडिया कम होता जाता है lइसके लिए समस्या का सही ढंग से पहचान करना होगा।

उद्घाटन सत्र में स्वागत भाषण कार्यशाला के संयोजक डॉ मनीष कुमार गुप्ता ने किया। संचालन डॉ राज कुमार और धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुनील कुमार ने किया। तकनीकी सहयोग डॉक्टर रामनरेश तथा श्री कृष्ण कुमार यादव जी ने दिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रो. राजेश शर्मा, डॉ एस पी तिवारी, प्रो. विक्रमदेव शर्मा, डॉ. प्रमोद यादव, डॉ संजीव गंगवार, अशोक कुमार यादव, डॉ आलोक गुप्ता क्षेत्रीय निदेशक राष्ट्रीय संस्थान ओपन स्कूलिंग तेलंगाना, डॉ. गिरधर मिश्र, डॉ शशिकांत यादव, डॉ. पुनीत धवन, ऋषि श्रीवास्तव आदि ने प्रतिभाग किया।
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