पीयूष जैन की आड़ में अखिलेश यादव के खजांची पर निशाना, अब तक 175 करोड़ बरामद

पीयूष जैन की आड़ में अखिलेश यादव के खजांची पर निशाना, अब तक 175 करोड़ बरामद

लखनऊ/कानपुर।
विजय आनंद वर्मा
तहलका 24×7
               इत्र कारोबारी पीयूष जैन के घर चल रही जीएसटी की कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कहा जा रहा है कि पीयूष जैन के बहाने सरकार पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सबसे करीबी समाजवादी पार्टी के एमएलसी पुष्पराज जैन उर्फ पम्पी जैन पर दबाव बनाना चाह रही है। पम्पी जैन को अखिलेश का खचांजी और पीयूष जैन का करीबी माना जाता है। कुछ दिन पहले जिस तरह से एक बड़े कपड़ा व्यापारी समेत अखिलेश के कई करीबियों पर जीएसटी का छापा डालकर दबाव बनाने की कोशिश की गई। उसी कड़ी से पीयूष जैन के यहां हुई कार्रवाई का जोड़कर देखा जा रहा है। पीयूष जैन की तरह पम्पी जैन का भी बड़ा कारोबार है। कानपुर और कन्नौज में जहां पीयूष जैन के घर हैं, वहीं पम्पी जैन के भी आवास हैं। ऐसे में पम्पी जैन भी चर्चा के घेरे में आ गए हैं।

पम्पी का पुराना राजनीतिक इतिहास रहा है। वह कांग्रेस और बसपा के भी काफी खास रहे हैं। बाद में वह समाजवादी पार्टी से जुड़े और अखिलेश यादव के सबसे विश्वास पात्र लोगों में शामिल हो गए। यह भी कहा जा रहा है पम्पी जैन ही वह बड़े कारोबारी हैं, जिन्होंने अपने संपर्कों के बल पर तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए गुजरात में इन्वेस्टर्स मीट कराई थी। उसके बाद से राजनीतिक गलियारे में उनकी धमक और भी बढ़ गई। जिस तरह से अडानी को भाजपा से जोड़कर देखा जाता है, उसी तरह से पम्पी को सपा से जोड़ा जाता है।

कर चोरी की आशंका में महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) अहमदाबाद की टीम ने समाजवादी इत्र बनाने वाले जिस पीयूष जैन के यहां गुरुवार को छापा मारा था, शुक्रवार को उसके घर की दीवारों से भी नोट मिले। दीवार को नोट छिपाने के लिए अलग तरह से बनाया गया था। शुक्रवार रात तक भी कैश गिनने का सिलसिला जारी रहा। कैश गिनने के लिए दूसरे दिन 13 और मशीनें मंगानी पड़ीं। शुक्रवार रात तक 175 करोड़ से अधिक की नकदी जब्त की गई है। 
# एक सांसद व बड़े कारोबारी पर शक

पीयूष जैन के यहां कार्रवाई के पीछे सत्ताधारी पार्टी के एक सांसद और एक बड़े कारोबारी का हाथ बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इन दोनों की पीयूष जैन और पम्पी जैन से पुरानी कारोबारी टशन है। यही वजह है कि ये लोग बीच-बीच में एक दूसरे पर भारी पड़ने की कोशिश करते हैं।

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