पड़ोसी जनपद सहित कई दर्जन गांवों को जोड़ने वाला मार्ग बुरी तरह से जर्जर

पड़ोसी जनपद सहित कई दर्जन गांवों को जोड़ने वाला मार्ग बुरी तरह से जर्जर

# सांसद और विधायकों के एक कार्यकाल को झेल नहीं सका मार्ग

# गड्ढा मुक्त अभियान के तहत पांच माह से गिट्टी-मिट्टी डालकर छोड़ा, लोग धूल फांकने को विवश

खेतासराय।
अज़ीम सिद्दीकी
तहलका 24×7
                प्रदेश सरकार विकास की गंगा बहाने की दावा कर रही है और जनप्रतिनिधि भी जगह- जगह बखान करने से नहीं थक रहे हैं। मंत्री गिरीश चन्द्र यादव भी जनता के अपने विभिन्न कार्यक्रमो के माध्यम से जिले में सड़क की जाल बिछा देने की ढोल पीटने में पीछे नहीं हटते है।लेकिन विकास खण्ड शाहगंज क्षेत्र के अंतर्गत एक मार्ग ऐसा है जो पड़ोसी जनपद आजमगढ़ सहित क्षेत्र के दर्जनों गांवों को जोड़ता है। जो पूरी तरह से गड्ढे में तब्दील हो गया है। पांच माह से उस पर गिट्टी-मिट्टी डालकर छोड़ दिया गया है। जिससे आने जाने वाले राहगीरों के मुसीबत बना है। राहगीर गिरकर चोटिल हो रहे है। इस पर जिम्मेदारों का रत्ती पर ध्यान नहीं जा रहा है। उधर से गुजरने वाले राहगीर जनप्रतिनिधि सहित वर्तमान सरकार को कोसते ही नज़र आते है।

 

आपको बता दें कि उक्त विकास खण्ड क्षेत्र के अंतर्गत स्थित गुरैनी से सोंगर मार्ग अपनी बदकिस्मती पर आंसू बहा रहा है गुरैनी से मानीकलां तक चार किलोमीटर जाने के राहगीर हांफने लगता है। नाम सुनते ही पसीना आने लगता है। बेबश होकर उसी रास्ते से गिरते- पड़ते आने जाने के लिए मजबूर है। सबसे बड़ी समस्या तब होती जब किसी मरीज या किसी गर्भवती महिला को प्रसव कराने के लिए गांव से शहर की तरफ रुख करना पड़ता है।बताते है कि कभी- कभी गर्भवती महिला को प्रसव रास्ते में ही हो जाता है। ऐसे में जच्चा और बच्चा दोनों के किये खतरा बना हुआ है। जबकि यह मार्ग पड़ोसी आज़मगढ़ सहित मानीकलां, बरंगी, ग्यासपुर, नोनारी, सोंगर, मवई, अमरेथुआ, मानीखुर्द, सन्दहा, झाँसेपुर, लखमापुर, भदेठी, कयार, भादो, चितारा समेत अन्य गांवों को जोड़ता है। फिर भी उक्त मार्ग से लगे आस-पास के गांव के लोगों के लिए यह मार्ग नासूर बना हुआ है।

एक सांसद और विधायकों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। इनके कार्यकाल में बना सड़क पूरी तरह इनके कार्यकाल ही नहीं चलता कि जर्जर होकर बिखर जाता है। उक्त मार्ग को मरम्मत के लिए जिस ठेकेदार ने जिम्मेदारी ली है वह भी बस कोरम पूरा कर रही है। पांच माह पूर्व गड्ढा मुक्त सड़क का अभियान चलाया गया। मजाल नही हुआ कि उसकी गंध यहाँ तक पहुँची हो। आज भी उजत मार्ग अपनी किस्मत पर आंसू बहा रहा है। उक्त मार्ग पर गिट्टी और मिट्टी डालकर छोड़ दिया गया है। जिससे राहगीर गिरकर घायल हो रहे है। अब देखना है क्या कोई प्रतिनिधि इसका सुधि लेता है या फिर राहगीर उसमें गिरकर घायल होते रहेंगे।

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