महिला सशक्तिकरण के तहत “आजीविका और रोजगार” पर वृहद कार्यशाला का आयोजित

महिला सशक्तिकरण के तहत “आजीविका और रोजगार” पर वृहद कार्यशाला का आयोजित

जौनपुर।
विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
तहलका 24×7
           सरजू प्रसाद शैक्षिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था जज कॉलोनी जौनपुर के तत्वाधान में मिशन शक्ति महिला सशक्तिकरण के तहत “आजीविका और रोजगार” पर वृहद कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के प्रोफेसर डॉ आर एन सिंह ने कहा की उपयोगिता के अनुसार शिक्षा की दिशा होनी चाहिए अनुपयोगी शिक्षा से भयंकर बेरोजगारी पैदा होगी। हमारे देश में नीड आफ अचीवमेंट नहीं है मानवीय विकास की जो धारा जब व्यक्ति सक्षम होगा तो राष्ट्र सक्षम होगा राष्ट्र सक्षम होगा तो देश सक्षम होगा।

स्थाई रूप से ग्रामीण परिवेश में आजीविका और रोजगार की बुनियादी जरूरत है। सर्वे कराकर परियोजना प्रस्ताव बनाकर सहकारिता आंदोलन चलाना पड़ेगा। लाइवलीहुड एक व्यापक शब्द है नेशनलिटी का लेवल हाई होना चाहिए। हमें कुछ करना है की सोच रखनी होगी। मुख्य अतिथि सहायक अधीक्षक व्यवसाय विकास पोस्ट मास्टर जनरल प्रयागराज प्रभाकर त्रिपाठी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के रोजगार के लिए सरकार ने अनेकों योजनाओं का शुभारंभ किया है।
वन डिस्टिक वन प्रोडक्ट जौनपुर की दरी और भदोही के कालीन घरेलू उद्योग और राष्ट्रीय उद्योग को बढ़ावा देने के लिए श्रमदान का कार्य करना होगा। मनरेगा में पात्र व्यक्ति का चयन करना होगा।कन्या समृद्धि योजना, अटल बीमा योजना, महिला बचत योजना, सुमंगला अनेकों योजना सरकार ने चलाया है।रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव डॉ मनोज वत्स ने कहा कि कोविड-19 जब से आया है आजीविका और उद्यम उद्योग पर गंभीर संकट छाया हुआ है रोजगार सभी की आवश्यकता है आजीविका का अभाव जिनको है। संस्था ऐसे लोगों की मदद करती हैं। कोरोना कॉल से उत्पन्न बेरोजगारी को दूर करने की आवश्यकता है।

वहीं गिरीश श्रीवास्तव गिरीश ने कहा कि सरकार राशन बांट कर लोगों का रोजगार छीन रही है। अच्छा है कि आजीविका की व्यवस्था की जाए। चिकित्सालय काउंसलर सीमा सिंह ने कहा कि योग्यता के अनुसार कार्य का वितरण होना चाहिए योग्य होने पर रोजगार का अभाव नहीं है। शिव शंकर चौरसिया ने कहा कि सोसाइटी को ग्रामीण विकास की तरफ ध्यान देना होगा। उद्योग व कल कारखानों को भी उत्तर प्रदेश में बढ़ावा देना होगा। जन शिक्षण संस्थान के अखिलेश पांडे ने कहा कि हमें रोजगार हेतु मूल परंपरागत व्यवस्था की तरफ वापस होना होगा। अमरेश पांडे ने कहा कि रोटी कपड़ा और मकान यह आजीविका व रोजगार से ही संभव है। आवास या राशन बांटने से नहीं। आवास नहीं आजीविका चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने किया। उक्त अवसर पर सीडब्ल्यूसी सदस्य चंद्र भूषण सिंह, कैलाश प्रजापति अजय शंकर प्रजापति, विनोद यादव, प्रवीण शुक्ला, श्रीपति सिंह, हिमांशु उपाध्याय, ईश नारायण सिंह, दिलीप, फूलचंद भारती, दिवाकर शुक्ला, रंजना उपाध्याय, बंदना उपाध्याय इत्यादि लोग मौजूद रहे।अंत में कार्यक्रम संयोजक संजय उपाध्याय संस्था सचिव पूर्व अध्यक्ष बाल न्यायालय ने आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत व आभार व्यक्त किया।
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