मानवता की मिसाल ! अपने लिए जिए तो क्या जिए….

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# मजहब की दीवार को तोड़ चार सालों में अब्दुल हक ने 31 शवों का कराया अंतिम संस्कार…

सुलतानपुर।
मुन्नू बरनवाल
तहलका 24×7
             मेनका गांधी के संसदीय क्षेत्र सुलतानपुर के रहने वाले अब्दुल हक लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। मानव सेवा को उन्होंने अपना धर्म और कर्म बना लिया है़। ये इस बात की बानगी भर है़ कि पिछले चार सालों में अब्दुल हक ने मजहब की दीवार को तोड़ कर 31 शवों का अंतिम संस्कार कराया। खास बात ये है़ कि शव को वो अपने हाथों से मुखाग्नि देते हैं।

लखनऊ-बलिया राजमार्ग पर स्थित कादीपुर कस्बे के निवासी समाजसेवी अब्दुल हक को कोतवाली नगर के सीताकुंड चौकी इंचार्ज का फोन पहुंचा कि एक अज्ञात का कल पोस्टमार्टम कराएंगे आकर उसका अंतिम संस्कार करा दो। इस सूचना पर अब्दुल हक हंसी-खुशी सुलतानपुर आए।
पोस्टमार्टम के बाद अज्ञात व्यक्ति का शव कॉन्स्टेबल अजय कुमार ने अब्दुल हक के सुपुर्द किया। वो शव को लेकर शहर स्थित गोमती नदी के तट पर बने सीताकुंड घाट पर लेकर पहुंचे और शव को मुखाग्नि दिया। इससे पूर्व 29 मई को कादीपुर में एक 85 वर्षीय वृद्ध ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया था। जिसका अब्दुल हक ने कादीपुर के गोमती किनारे स्थित देवाढ़घाट पर अंतिम संस्कार किया था।

कादीपुर के तुलसीनगर निवासी समाजसेवी अब्दुल हक ने कहा कि ऊपर वाले की इच्छा यही थी कि हम समाज में पीड़ितों के लिए कुछ करें। उन्होंने कहा कि जो लोग लावारिस हालत में काल के गाल में समा जाते हैं, उनके लिए हम उनके परिजन बन उनका अन्तिम संस्कार उनके धर्म के अनुसार कर रहे ताकि उन्हें सद्गति प्रदान करें। उन्होंने बताया कि शव के कफन से लेकर समस्त खर्च को अपने पास से वहन करते हैं। उपस्थित लोग नवनीत सिंह, एडवोकेट अम्बिकेश सिंह, गुलाम मोहम्मद अंसारी, गुफरान कॉन्स्टेबल, अजय कुमार कोतवाली नगर सुल्तानपुर मौजूद रहे।
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