योग दिवस विशेषांक : स्वयं को स्वयं के माध्यम से स्वयं तक पहुंचाने की यात्रा है योग

योग दिवस विशेषांक : स्वयं को स्वयं के माध्यम से स्वयं तक पहुंचाने की यात्रा है योग

# सुखद, संतुलित और स्वस्थ्य जीवन जीने की एक मात्र कुंजी है योग

# तहलका 24×7 प्रतिनिधि अज़ीम सिद्दीकी एंव पत्रकार सुरेश कुमार की कलम से..

‘योग मेरे जीवन का सहारा है। मैं इसे वर्षों से कर रहा हूँ। मेरे जीवन में इससे बहुत परिवर्तन आया है। ज्यादातर लोग योग को अंग मर्दन का माध्यम मानते है। मैं मानता हूं कि यह सबसे बड़ी गलती है अगर योग मर्दन का कार्यक्रम होता, तब सर्कस में काम करने वाले बच्चे योगी कहलाते। शरीर को केवल मोड़ देना या अधिक से अधिक लचीला बनाना ही योग नहीं है। योग जी भर कर जीवन जीने की जड़ी- बूटी है। योग व्यवस्था नहीं, एक अवस्था है। योग से शांति मिलती है यदि मस्तिष्क शरीर का मंदिर है तो योग एक सुन्दर मन्दिर का निर्माण करता है।

इस बात के कई प्रमाण है कि योग तनाव और जटिल बीमारियों से लड़ने से हमारी मदद करता है। योग दिवस प्रेम, शांति और एकता का प्रतीक है। इसका मकसद मानव कल्याण और दुनिया को तनाव मुक्त बनाने के साथ- साथ दुनिया में सद्भावना का संदेश पहुँचाना है। इसको जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आप सब संकल्प भी ले…यह वक्तव्य देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी के 21 जून 2015 को दिल्ली राजपथ से योग करने से पूर्व कहा है। देश के प्रधानमंत्री इस दिन को अन्तरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल किया था। जिसको संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून 2014 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया।

योग हमारी भारतीय संस्कृति की प्राचीनतम पहचान है। यह सुखद, संतुलित और स्वस्थ्य जीवन जीने की एक मात्र कुंजी है। युगों पुराना यह योग भारत के स्वर्ण काल का आधार रहा है। वक्त के तह में योग धुंधला गया था। वर्तमान में इतने डे बढ़ गए है जैसे वैलेंटाइन्स डे, फ्रेंडशिप डे, हग डे, किस डे…आदि की। भारतीय संस्कृति कला व योग जैसे विषय तो बस किताबों में इतिहास या पाठ्यक्रम का हिस्सा बनकर रह गया है। ऐसे में भला हो टीचर्स डे का जो औपचारिकतावश स्कूल कॉलेज में गाहे- बगाहे मना लिया जाता है वरना ‘गुरुपूर्णिमा’ का तो हाल और बुरा है।

खास तौर से युवाओं को तो पता ही नहीं चलता कि ‘गुरुपूर्णिमा’ कब और क्यों मनाई जाती है? लेकिन बदलते समय में योग का धुंधला बादल छटा और लोग जीवन का हिस्सा बनाने की कोशिश में जुटे है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अपार सफलता ने योग के शिखर पर पहुँची है। इतना ही नहीं बल्कि गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बनाकर भारत को विश्व के पैमाने पर नई पहचान हासिल किया है। जिसका श्रेय भारत के वर्तमान प्रधानमन्त्री को जाता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने एक फिर से एक नई उम्मीद जगाई है। विशेष बात तो यह है कि योग को वैश्विक स्तर पर समझे जाने और अपनाने की बात शुरू हुई है। और तो और योग से जुड़ी मान्यताएं एंव परिभाषाएं सही अर्थों में प्रकट होने लगी है।

योग आध्यामिक प्रक्रिया है। जिसका उल्लेख कई धर्म जैसे हिन्दू, बौद्ध और जैन में मिलता है। अब जब मामला अध्यात्म से जुड़ जाएं तो कुछ धार्मिक संगठनों में योग को लेकर विवाद तो होना ही है। कुछ मुस्लिम संगठन योग को अपने धर्म के विरुद्ध मानते है। शायद इसी वजह से 2008 में मलेशिया और फिर बाद में इंडोनेशिया की प्रमुख इस्लामिक संस्था ने योग के खिलाफ फतवा जारी किया हालांकि इन फतवों को दारुल उलूम, देवबंद ने आलोचना की। इस्लामिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार भी साफ कर चुकी है कि योग करते वक्त ना तो श्लोक पढ़ना जरूरी है ना तो सूर्य नमस्कार।

जिस मंत्रालय पर अंतराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन की जिम्मेदारी थी श्रीपद नायक कहते है कि मुस्लिम योग करते वक्त अल्लाह का नाम ले सकते है। वैसे भी दारुल उलूम, देवबंद ने भी योग दिवस का समर्थन करते हुए कहा है कि इसका किसी मज़हब से कोई लेना देना नहीं है। यह संस्था साफ तौर पर मानती है योग एक व्यायाम है।योग क्या है, जब भी इस बात का जिक्र उठता है तो मन- मस्तिष्क के आगे आसन लगाएं किसी वृद्ध व्यक्ति या साधु- बाबा की तस्वीर उभर आती है और हम मान लेते है कि योग न केवल शरीर की विभिन्न आड़ी- तिरछी मुद्राओं का नाम है बल्कि यह धार्मिक एंव बुजुर्ग लोगों के ही करने की चीज़ है। नहीं… ऐसा नहीं है, योग का सम्बंध किसी विशेष आयु, धर्म एंव शरीर के आसन से ही नहीं है।

योग का अर्थ, शरीर द्वारा किए जाने वाले आसन से ही नहीं और भी बहुत कुछ है। योग का अर्थ है जोड़, सन्धि, एकात्मकता। योग संस्कृत भाषा के शब्द ‘युज’ से उत्पन्न हुआ है। जिसका अर्थ है ‘जुड़ना’। योग हमारे शरीर में और आत्मा के बीच सयंम व सतुंलन स्थापित करता है तथा हमारे जीवन को सरल और सकारात्मक बनाता है क्योंकि भीतर- बाहर के इस जोड़ में शारीरिक मानसिक इसीलिए हमें लगता है कि योग का अर्थ व उसकी सीमा सिर्फ योगासन तक ही है।अधिकतर लोग योग को धर्म- अध्यात्म एंव बुजुर्गों द्वारा किये जाने वाले शारीरिक आसनों से जोड़कर ही देखते है, तो कोई सोचता है कि योग स्वयं को निरोगी रखने का अति प्राचीन तरीका है। जबकि सच तो यह है कि योग एक ऐसी सुलभ एंव प्राकतिक पद्धति है जिससे स्वस्थ्य मन एंव शरीर के साथ अनेक लाभ किये जा सकते है।
योग मानव जीवन को शाररिक, मानसिक व आध्यात्मिक सभी प्रकार से लाभवन्ति करता है। यह अपने आप में पूर्ण वैज्ञानिक चिकित्सा प्रणाली है। जिसका सम्बन्ध मात्र दिव्य ऊर्जा से ही नहीं विज्ञान से भी है। योग हर आसान का वैज्ञानिक आधार है जिसे आज के विश्व भर के डॉक्टरों ने भी स्वीकार किया है। योग शारीरिक और मानस रूप से मानव जाति के लिए वरदान है योग द्वारा अनेक रोगों को मात दी जा सकती है लेकिन इससे जुड़ी कई संवैधानिक नियम व परहेज़ आदि भी है। योग एक स्वस्थ्य जीवन का आधार है। इसके लिए सुबह- सुबह का वक्त सबसे अच्छा होता हैं जब पेट पूरी तरह से खाली हो जगह साफ- सुथरी हो और वहां पर ताज़ी हवा का प्रवाह होता रहे। अब सवाल यह है कि योग कितनी देर तक किया जाएं इस बारे में योग गुरु बाबा रामदेव कहते है 15- 30 मिनट का समय पर्याप्त है।
बस जरूरत इस बात का है जिस आसन के बारे में जानकारी नहीं है या करना नहीं आता है उसे नहीं करना चाहिए। यह बिल्कुल उसी तरह है जिस तरह से व्यायाम की कुछ विधियों के बारे जानकारी नहीं है और किये जाएं तो उससे दिक्कत ही पैदा हो सकती है।अब बात यह है कि 21 जून को ही क्यों योग दिवस और भी कोई दिन हो सकता था। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार जब पहली बार 2014 में आयी थी तो उस समय 27 सितंबर 2014 को उन्होंने सयुक्त राष्ट्र संघ में अपने सम्बोधन में योग भारतीय इतिहास के तहखाने पड़े योग को नई पहचान दिलाने का प्रस्ताव दिया था। प्रस्ताव के कुछ दिन बाद भारत सरकार से पूछा गया था कि किस दिन अंतराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया जा सकता है। इस बात का निर्णय योग गुरु रामदेव के साथ पतंजलि योगपीठ ने लिया। निर्णय में 21 जून को यह कहकर सुझाया गया कि यह दिन साल का सबसे लंबा दिन होता है और योग की मनुष्य को दीर्घ जीवन प्रदान करता है।
रामदेव जी की सुझाई तारीख को प्रधानमंत्री और भारत सरकार ने स्वीकृति करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ को भेजी, जिसे मंजूरी कर लिया गया और 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया। 21 जून 2015 को योग दिवस के मौके पर दिल्ली के राजपथ पर प्रधानमंत्री की मौजूदगी में भव्य योग दिवस का आयोजन किया गया था। जिसमें 35 हज़ार से ज्यादा लोगों ने योग किया था। वही वरिष्ठ मंत्रियों में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भाग ली थी। इसके साथ ही साथ 192 देशों के 251 शहरों में योग के सामूहिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें 46 मुस्लिम देश भी शामिल थे। एक साथ दुनिया भर में कुल मिलकर दो करोड़ लोगों ने योग किया था। तब से समय- समय पर योग दिवस के मौके पर कार्यक्रम के माध्यम से योगाभ्यास कराया जाता रहा है।

अब बात यह आती है योग करने से क्या फायदा और योग क्यो किया जाएं। इस सम्बंध में पद्यविभूषन बेल्लर कृष्णचारी सुंदर राज यानी बीकेएस अयंगार की जिंदगी से मिल जाएगी। बीते वर्ष उनके निधन पर बीबीसी ने उन्हें योग इंटरनेशनल ब्रांड एम्बेसडर के रूप में सम्बोधित किया था। 2007 में न्यूयॉर्क टाइम्स में कहा था कि योग ने उन्हें 65 साल का बोनस दिया है क्योंकि बचपन मे कई बीमारियों से घिरे रहने के कारण बच्चों में डॉक्टरों को यह उम्मीद नही थी कि 20 साल की उम्र से ज्यादा जी पाएंगे। लेकिन उन्होंने एक लंबी जिन्दगी जी और 95 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उन्होंने अयंगार योग की स्थापना की तथा इसे सम्पूर्ण विश्व मे मशहूर बनाया। उन्होंने विभिन्न देशों में अपने संस्थान की 100 से अधिक शाखाएं स्थापित किया। यूरोप में योग फैलाने में वे सबसे आगे थे।
आज के मनुष्य और उसकी दिनचर्या को देखते हुए बहुत से आसन ऐसे है जो हमें योग ग्रंथ में नहीं मिलता। देश काल एंव परिस्थितियों को देखते हुए नए- नए योग गुरुओं ने नए योगासन खोजे है कुछ लोगों ने पारंपरिक आसनों में कुछ परिवर्तन किए है। आधुनिक युग में ऐसे बहुत से लोग है जो योग से अधिक व्यायाम को प्राथमिकता देते है उन्हें पुराने जमाने का, कम असरकारक लगता है। जबकि सच तो यह है कि योग ही व्यायाम से बेहतर है। व्यायाम की कुछ सीमाएं व दुष्प्रभाव भी है किंतु योग में नहीं है।भारतीय धर्म और दर्शन में योग का अत्यधिक महत्व है। आध्यात्मिक उन्नति या शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग की आवश्यकता व महत्व को प्रायः सभी दर्शनक एंव भारतीय धार्मिक सम्प्रदायों ने एकमत व मुक्तकंठ से स्वीकार किया है। अनादिकाल से भारत भूमि योग भूमि के रूप में विख्यात रही है।
यहां कण- कण, न जाने कितने योगियों योग- साधना से आप्लावित हुआ है। योगियों को गहन योग- साधना के कारण यहां की माटी धन्य है और धन्य है यहां की हवाएं, जो योग- साधना के शिखर पुरुष की साक्षी है। आधुनिक युग में योग का महत्व बढ़ गया है। इसके बढ़ने का कारण व्यवस्था और मन की व्यग्रता है। आधुनिक मनुष्य को आज योग की ज्यादा आवश्यकता है जबकि मन और शरीर अत्यधिक तनाव, वायु प्रदूषण तथा भागभाग के जीवन से रोगग्रस्त हो चला है। आधुनिक व्यथित चित या मन आने केंद्र से भटक गया है। उसके अंतर्मुखी और बहुमुखी होने से संतुलन नहीं रहा। अधिकतर अति बहुमुखी जीवन जीने में ही आनंद लेते है जिसका परिणाम सम्बन्धों में तनाव और अव्यवस्थित जीवनचर्या के रूप में सामने आया है।

योग भविष्य का धर्म और विज्ञान है। भविष्य में योग का महत्व बढ़ेगा। यौगिक क्रियाओं से सब कुछ बदला जा सकता है। जो हमे प्रकृति ने दिया है वह सब कुछ पाया जा सकता है। पतंजलि एक प्रख्यात चिकित्सक और रसायन शास्त्र के आचार्य थे। रसायन विज्ञान के क्षेत्र में अभ्रक, धातुयोग और लौह्शास्त्र का परिचय कराने का श्रेय पतंजलि को जाता है। राजा भोज ने महर्षि पतंजलि को तन के साथ ही मन के चिकित्सक की उपाधि से विभूषित किया था। इनको आयुर्वैदिक ग्रन्थ चरक संहिता का जनक माना जाता है। इनको योगशास्त्र के जन्मदाता की उपाधि भी दी जाती हैं। जो हिन्दू धर्म के छह दर्शनों में से एक है। इन्होंने योग के 195 सूत्रों को स्थापित किया। जो योग दर्शन के आधार स्तंभ हैं। इन सूत्रों के पढ़ने की क्रिया को भाष्य कहा जाता है। महर्षि पतंजलि ने अष्टांग योग की महत्ता का प्रतिपादन किया है। जिसका जीवन को स्वस्थ रखने में विशेष महत्त्व है।इनके नाम इस प्रकार है यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि। ये योग का आठ चरण है। देखा जाएं तो यह योग का सम्पूर्ण विज्ञान एक ही वाक्य में है।
इन आठ अंगों का क्रमबद्ध व सूत्रबद्ध पालन ही योग का विज्ञान कहलाता है ये आठ अंग परस्पर गहन सबन्ध है। जिसके क्रम को परिवर्तित नही किया जा सकता। कहते है कि दुनिया की कुल आबादी में लगभग दस करोड़ व्यक्ति किसी न किसी मनोरोग से पीड़ित है। एक अध्ययन के अनुसार अकेले भारत वर्ष में ही दो करोड़ से अधिक लोग मनोरोगी है। जाने- अनजाने प्रत्येक व्यक्ति किसी न मनोरोग से सदा पीड़ित रहता है चिंता, घबराहट, नींद की कमी, निराशा, चिड़चिड़ापन, नकारात्मक सोच ये सब मनोरोग के लक्षण है। यह मानसिक पंगुता की शुरुआत है। इससे मस्तिष्क कुण्डित हो जाता है। ऐसे में बचने के लिए योग एक बेहतर उपाय है। जिसे आप जीवन में हिस्सा बनाकर स्वस्थ जीवन और खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकते है।

गीता में लिखा गया है: ‘योग स्वयं की स्वयं के माध्यम से स्वयं तक पहुँचाने की यात्रा है’ आज के दौरान हर कोई इंसान किसी न रोग से ग्रस्त है। बिना दवाइयों के जीवन गुजार पाना असम्भव हो गया है। इसके पीछे का असली कारण है इंसान सही ढंग से खान पान का ध्यान न देना। धीरे- धीरे आलसी होता चला जा रहा है। भौतिक सुख- सुविधा के चक्कर में बीमारियों के काल मे चला जा रहा है। इससे बचने के लिए नायब तरीका योग साबित हो सकता है। योग से मन, शरीर और जीवन खुशहाल रहता है। योग करने से शरीर को विभिन्न फायदे है। लेकिन एक दिन मात्र कर लेने से फायदे दिखने नही लगते है। इसको धीरे- धीरे करते रहना चाहिए और खाली पेट सुबह शुद्ध वातारण के बीच करना चाहिए।
योग से आज के समय मे तेज़ी से बढ़ रही मोटापा के रोग से मुक्ति प्राप्त कर सकते है। योग से चिंता एंव तनाव कम होता है। मधुमेह से छुटकारा, रक्तचाप, रक्त संचार ठीक ढंग से होना, बेहतर श्वसन प्रणाली, गैस से निजात मिल सकता है। इसके साथ ही साथ दर्द सहने की क्षमता बढ़ जाती है। कोरोना महामारी में जिसका इम्युनिटी पावर कम था वह आसानी से महामारी की चपेट में आ रहा है। इम्युनिटी सिस्टम को बढ़ाने के लिए योग अच्छा और मुक्त उपाय है आप योग के माध्यम से अपने इम्यूनिटी को बढ़ा सकते है।हर वर्ष योग दिवस का अलग- अलग थीम होता है। जो समय परिस्थिति के अनुरूप होता है और उसका महत्व भी होता है। पहले अंतराष्ट्रीय योग दिवस 2015 का थीम सद्भाव और शांति के लिए योग, 2016 में योग दिवस का थीम युवाओं पर आधारित था।

जिसका उद्देश्य दुनिया भर के युवाओं को एकता के सूत्र में पिरोना था। 2017 में स्वास्थ्य के लिए योग, 2018 में शांति के लिए योग, 2019 में जलवायु क्रिया के लिए योग, 2020 में पूर्ण बन्दी की वजह से घर पर योग, परिवार के साथ योग का थीम था। इसी तरह इस बार सातवें अंतराष्ट्रीय योग दिवस का थीम योग के साथ रहे, घर पर रहे के महत्व को लेकर रेखांकित किया गया है। योग दिवस को लेकर मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) के सहयोग से आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित एक घण्टे चलने वाले कार्यक्रम में केंद्रीय सूचना एंव प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर तथा केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री किरेन रिजिजू ने योग को समर्पित एक मोबाइल एप्लीकेशन नमस्ते योग भी लांच किया गया।

वर्तमान में हर व्यक्ति को योग को अपने जीवन मे उतार लेना चाहिए। सुबह के मात्र आधा घण्टे का योग आपको दिनभर ताज़गी महसूस करता रहता है। लेकिन व्यक्ति व्यवस्था व आधुनिक सुख में चूर होकर सुबह उठना टहलना भूल जाता है। इसकी याद तब आती है जब उसे बीमारी घेर लेती है। ज्यादातर सुख- सुविधा के संसाधन आपको बीमार कर रहे है? दिनोरात मोबाइल से काम और बिजी के चक्कर में देर तक सोना सुबह नहीं उठाना जीवनचर्या को असन्तुलित कर देता है। इसकी लिए दृढ़ संकल्पित होकर नित्य योग करना चाहिए। हर साल की तरह इस साल भी 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा।
स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि- योग आयु की वृद्धि करता है। कोरोना काल में योग की उपयोगिता पहले से काफी बढ़ गई है। कोविड रिकवरी के बाद भी कई लोगों को योग से काफी फायदा मिला है, हो सकता है कि पिछले साल की तरह इस साल भी कोविड-19 के मद्देनजर, इस वर्ष का अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मनाया जाए। कोरोना के कारण योग दिवस पर कोई भी सामूहिक समारोह या कार्यक्रम सेफ नहीं होगा।
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