रामकथा मर्यादित आदर्श व संस्कारित संस्कृति की परिचायक- बाबा बजरंगदास

रामकथा मर्यादित आदर्श व संस्कारित संस्कृति की परिचायक- बाबा बजरंगदास

कादीपुर।
मुन्नू बरनवाल
तहलका 24×7
                  “भगवान की मंगलमय कथा संसार का कल्याण करती है रामकथा मात्र कथा नहीं है, वह एक पारंपरिक इतिहास भी नहीं है रामकथा एक मर्यादित आदर्श व संस्कारित सनातन संस्कृति की परिचायक है” उक्त बातें बाबा बजरंगदास ने जूनियर हाईस्कूल मैदान में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय रामकथा के छठवें दिन रामकथा के दौरान कही।बाबा बजरंगदास ने कहा कि अहंकार का त्याग किये बिना ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती। भगवान के जिस चरण को पाने के लिए लोग हजारों जन्म लेते हैं उसे केवट सहजता से पखारता है ऐसा भक्ति और समर्पण के कारण ही सम्भव हो सका।

भगवान राम के चरणों में सबकुछ है केवट ने भगवान का चरण मांगकर सबकुछ पा लिया। बाल व्यास सम्पूर्णानंद ने कहा कि शुभ संकल्प क्रिया और ईश्वर की कृपा के एकत्रित होने से ही कोई भगवत कार्य प्रारंभ होता है ईश्वर में विश्वास बनाए रखना बहुत आवश्यक है। संचालन मथुरा प्रसाद सिंह जटायु ने किया। इस अवसर पर राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज के प्रधानाचार्य प्रदीप त्रिपाठी, सभासद सूर्यलाल गुप्त, बृजेश सिंह, इंद्रसेन सिंह, कौशल सिंह समेत अनेक प्रमुख लोग मौजूद रहे। संयोजक सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रतिदिन सायं साढ़े छह से रात दस बजे तक होने वाली यह रामकथा एक नवंबर तक चलेगी।
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