रूद्र की नगरी काशी में गंगा का रौद्र रूप, तटीय गांव- कॉलोनियां डूबीं

रूद्र की नगरी काशी में गंगा का रौद्र रूप, तटीय गांव- कॉलोनियां डूबीं

# लगातार जलस्तर बढ़ने से अब गंगा का रूख शहर की ओर…

वाराणसी।
मनीष वर्मा
तहलका 24×7
                 गंगा में उफान थमने का नाम नहीं ले रहा है कई इलाकों को जलमग्न करने के बाद गंगा अब शहर की ओर बढ़ रही हैं। वहीं, बढ़ते जलस्तर के कारण टिकरी में बना हुआ अस्थायी बांध बुधवार को टूट गया। बांध टूटने के बाद बाढ़ का पानी बस्तियों की ओर तेजी से बढ़ने लगा। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शाम को छह बजे गंगा का जलस्तर 72.12 मीटर दर्ज किया।

बुधवार की सुबह गंगा के जलस्तर में बढ़ाव का सिलसिला जारी रही है। वहीं देर रात से हो रही बरसात के कारण बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थितियां गंभीर हो गई हैं। वाराणसी में तटवर्तीय इलाकों में बाढ़ से लोग परेशान हो गए हैं। सैकड़ों परिवारों को पलायन कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। शिविरों में भी उनको खाने, रहने की समस्या हो रही है।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, बुधवार सुबह 8 बजे 72.02 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान (71.26 मीटर) से 76 सेंटीमीटर ऊपर था। इसके बाद गंगा के जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ाव जारी था। दोपहर 12 बजे गंगा का जलस्तर 72.06, तीन बजे 72.09 और शाम को छह बजे गंगा का जलस्तर 72.12 मीटर तक पहुंच गया।
जलस्तर में बढ़ाव के कारण टिकरी में 2013 में बना अस्थायी पांच फीट ऊंचा और चार फीट चौड़ा बंधा बह गया। इससे टिकरी और रमना बनपुरवा के दक्षिणी हिस्से में रहने वाले लोगों को पलायन करना पड़ा। पानी भरने के कारण दर्जनों घर तराई में डूब गए।

पानी फैलकर टिकरी साहनी बस्ती और रमना कुटिया की तरफ चढ़ने लगा है। टिकरी के रहने वाले रमेश साहनी, मुरली साहनी, मल्लू साहनी ने बताया कि बाढ़ का पानी चढ़ने से इन लोगों का घर डूब गया। सामनेघाट की आधा दर्जन से अधिक पॉश कालोनियां गंगा में डूब चुकी हैं। करोड़ों के आलीशान मकान में रहने वाले लोग सुरक्षित ठिकानों पर पनाह ले रहे हैं। कोई बाढ़ राहत शिविर तो कोई अपने रिश्तेदारों और परिचितों के यहां ठहरा है।
Previous articleमां-बाप की मौत के बाद काम मांगने आई जौनपुर की किशोरी को ढकेला देह व्यापार में
Next articleसुल्तानपुर : ट्रांसफार्मर जलने से तीन दिन से सूरापुर बिजेथुआ रोड अंधेरे में…
तहलका24x7 की मुहिम... "सांसे हो रही है कम, आओ मिलकर पेड़ लगाएं हम" से जुड़े और पर्यावरण संतुलन के लिए एक पौधा अवश्य लगाएं..... 🙏