वक्त कल मुझको मिला..

वक्त कल मुझको मिला..

युवा रचनाकार रूद्र त्रिपाठी की नवीन कृति

वक्त कल मुझको मिला,
पूछ रहा था मुझसे कि
वक्त कैसा कट रहा है
मैंने कहा भाई..
लम्हें बिंदास है
घड़ियां मस्त हैं
सुबह शाम आते जाते हैं
दिन झक्कास है..
सूरज आता है
तिलमिलाता है
चाँद हंसकर एक
ठंडक छोड़ जाता है..
हवाएं अक्सर मुझसे
बातें करती हैं
पेड़ मुझसे झगड़ते हैं
फूल मुझे चिढ़ाते हैं..
खुशबुएँ मुझे गले लगाती हैं
बगीचे मुझे बुलाते हैं
राहें पलकें बिछाती हैं
हंसी मेरे चेहरे को चूमती है..
खुशी दिल को खिलाती है
मेरे अपने मुझे दुलारते हैं
दोस्त मेरी बलाएँ उतारते हैं
हवा के झोंके मेरी राहें संवारते हैं..
क्या बताऊँ तुम्हे,
ज़िन्दगी ने बहुत कुछ दिया मुझे
मेरे अपने मेरे लिए
अपनापन हारते हैं….
लेखक:- रुद्र त्रिपाठी
डायरेक्टर:- रुद्र कोचिंग क्लासेज
मैनेजिंग डायरेक्टर:- सेंट बीन स्कूल
प्रबन्धक व मीडिया प्रभारी:- धार्मिक सेवा समिति
महमदपुर, उनुरखा
कादीपुर, सुल्तानपुर
📱+91 9453789608

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