वाराणसी : धोखाधड़ी के पीड़ितों को धमका रहे नीलगिरी इंफ्रासिटी के गुर्गे

वाराणसी : धोखाधड़ी के पीड़ितों को धमका रहे नीलगिरी इंफ्रासिटी के गुर्गे

# चेतगंज थाने में पहुंची शिकायत, पीड़ितों ने लगाई जान-माल के रक्षा की गुहार

वाराणसी।
मनीष वर्मा
तहलका 24×7
                 करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले के आरोपी नीलगिरी इंफ्रासिटी कंपनी के सीएमडी विकास सिंह के गुर्गे पीड़ितों को धमका रहे हैं। वहीं कंपनी के कर्मचारियों को भी धमकाकर ग्राहकों का डाटा मांगा जा रहा है। चेतगंज थाने में कुछ युवकों ने इसकी शिकायत की है। नीलगिरी इंफ्रासिटी की गोल्डन स्काई टूर एंड ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड का साफ्टवेयर भी नष्ट करने की योजना है उस साफ्टवेयर में ग्राहकों का डाटा फीड है। एसआईटी भी इसकी तस्दीक में जुटी हुई है।

चेतगंज थाने में सोमवार और मंगलवार को कुछ पीड़ितों और कुछ पुराने कर्मचारियों ने शिकायत की। आरोप लगाया कि सीएमडी विकास सिंह और एमडी के परिजनों द्वारा धमकी दी जा रही है। टूर पैकेज और गोल्ड में निवेश करने वाले और एक साथ कई लोगों को स्कीम में जोड़ने वालों का आंकड़ा एक साफ्टवेयर में दर्ज है। उस साफ्टवेयर को हथियाने के लिए पुराने कर्मचारियों खोजा जा रहा है। सुंदरपुर के रहने वाले पीड़ित रविंद्र के अनुसार टूर पैकेज स्कीम में पैसा लगाया था लेकिन मुनाफा तो छोड़िए मूलधन भी नहीं निकल पाया।

कंपनी की ओर से जो चेक दिया गया, वह भी बाउंस हो गया। वहीं महमूरगंज निवासी कंपनी के सीएमडी विकास सिंह, एमडी पत्नी ऋतु सिंह और प्रबंधक प्रदीप यादव को चेतगंज थाने की पुलिस ने 31 अगस्त को गिरफ्तार किया था। तीनों जेल में बंद हैं।इस मामले में पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने जांच टीम गठित किया है। वहीं प्रवर्तन निदेशालय ने भी नीलगिरी इंफ्रासिटी कंपनी पर धोखाधड़ी की फाइल मंगाकर जांच शुरू की है। इंस्पेक्टर चेतगंज परमहंस गुप्ता ने कहा कि नीलगिरी इंफ्रासिटी से खुद को पीड़ित बताते हुए लोग थाने पहुंच रहे हैं और शिकायती पत्र भी दे रहे हैं।

उच्चाधिकारियों के निर्देश पर मुकदमा दर्ज भी किया जा रहा है। धोखाधड़ी के दो मुकदमे और दर्ज हुए हैं। हालांकि धमकी जैसी बात की भी जांच कराई जाएगी। विभिन्न तरह की स्कीम और आफर देकर ग्राहकों को नीलगिरी इंफ्रासिटी की गोल्डन स्काई टूर एंड ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड में जोड़ा जाता था। यह भरोसा दिलाया जाता था कि निवेश करने पर उतने का ज्वेलरी ले सकते हैं। कंपनी के नेटवर्क में शहर के दस बड़े सराफा कारोबारियों से थे। एसआईटी इस पहलुओं पर जांच शुरू कर सकती है।
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