वाराणसी में गंगा उफान पर, शीतला माता मंदिर के गर्भ गृह में घुसा पानी

वाराणसी में गंगा उफान पर, शीतला माता मंदिर के गर्भ गृह में घुसा पानी

# अब छत से होगी गंगा आरती, खतरे के निशान की ओर बढ़ रही है गंगा

वाराणसी।
मनीष वर्मा
तहलका 24×7
                वाराणसी में गंगा का जलस्तर अब खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। मंगलवार की दोपहर गंगा बड़ी शीतला मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर गईं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का जलस्तर 67.59 मीटर दर्ज किया गया। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है।

मंगलवार को गंगा नदी का जल स्तर काशी में प्रति घंटा एक सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहा है। गंगा घाटों का संपर्क पूरी तरह से टूट चुका है। शीतला घाट स्थित माता शीतला मंदिर के गर्भ गृह तक दोपहर में गंगा का पानी पहुंच गया। इसके कारण माता शीतला के मुखौटे को बढ़ते जलस्तर के कारण अहिल्याबाई घाट स्थित अहिलेश्वर महादेव के मंदिर में ले जाना पड़ा। मंदिर के लिंगिया महाराज ने बताया कि माता शीतला की आरती और भोग का स्थान महादेव के मंदिर यानी छत पर कर दिया गया है।

शीतला घाट पर मौजूद दुकानों को ऊपर कर दिया गया है। शीतला घाट की गंगा आरती का भी स्थान बदल कर ऊपर की सीढ़ियों पर हो गया है। वहीं घाट की सीढ़ियों को पार करते हुए पानी आसपास के कई मंदिरों में पहुंच गया। इसे देखते हुए अब दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती का स्थान बदल दिया गया है। आरती अब गंगा सेवा निधि कार्यालय की छत पर होगी।

# बड़ी शीतला माता मंदिर में प्रवेश किया गंगा जल

बता दें कि पहाड़ों पर हो रही बरसात के कारण बनारस में गंगा चेतावनी बिंदु की ओर बढ़ने लगी हैं। जलस्तर बढ़ने से महाश्मशान मणिकर्णिका पर शवदाह के लिए आने वालों को घंटों का इंतजार करना पड़ रहा है। मणिकर्णिका घाट पानी में डूबने के कारण अब छतों पर शवदाह शुरू हो चुका है।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का जलस्तर मंगलवार को 67.59 मीटर पहुंच गया। चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से अब 2.67 मीटर से भी कम दूर जलस्तर रह गया है। गंगा अब खतरे के निशान बिंदु 71.26 मीटर की ओर अग्रसर हो रही है। इसे देखते हुए नौका संचालन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

# वरुणा पार मची खलबली

गंगा के सभी 84 घाटों का संपर्क दो दिन पहले ही टूटने के बाद प्रमुख गंगा घाटों के आरती स्थल भी बदल गए हैं। तेजी से हो रहे बढ़ाव के कारण गंगा के साथ ही वरुणा नदी के किनारे रहने वालों में खलबली मची है। गंगा के पलट प्रवाह के कारण सबसे ज्यादा बाढ़ का कहर वरुणा किनारे रहने वालों को ही झेलना होता है।
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