विश्व रक्तदान दिवस : मां को खून न दे पाने की कसक ने बना द‍िया रक्तदाता

विश्व रक्तदान दिवस : मां को खून न दे पाने की कसक ने बना द‍िया रक्तदाता

# 18 साल की उम्र से कर रहे रक्तदान, अनगिनत लोगों की बचा चुके हैं जान

लखनऊ/मुरादाबाद।
विजय आनंद वर्मा
तहलका 24×7
            पेशे से व्यापारी हैं.. काम की वजह से समय का भी अभाव है लेकिन, इंसानियत का जज्बा कूट-कूटकर भरा है। मां को खून न दे पाने की कसक ने बनवारी लाल तोदी को सबके लिए मददगार इंसान बना द‍िया। 18 साल की उम्र से लगातार इंसानियत के लिए खून देने वाले इस व्यापारी ने अनगिनत बार लोगों को खून देकर जान बचाई है। आज इनकी 47 साल की उम्र हो चुकी है लेकिन, दूसरों की जान बचाने का जज्बा वही है। कोशिश रहती है कि उनके खून से किसी की जिंदगी बच जाए।

कहते हैं क‍ि मेरे खून के एक कतरे से किसी को जिंदगी मिलती है ताे शरीर का एक-एक कतरा निकाल लो। व्यापारी बनवारी लाल तोदी के इस जज्बे को हर कोई सलाम करता है। उन्होंने अपने वाट्सअप स्टेटस पर भी अपना ब्लड ग्रुप लिख रखा है। 18 साल की उम्र से लगातार रक्तदान करते आ रहे हैं।
जिले की सामाजिक संस्था जागृति केंद्र से जुड़े होने की वजह उसे उनके पास लगातार किसी न किसी का बी-पॉजिटिव रक्त के लिए फोन आता रहता है। नौ मई को उन्होंने कोरोना संक्रमित की जिंदगी के लिए प्लाज्मा भी दान किया। उनका कहना है कि कितना भी काम हो, अगर खून के लिए किसी की काल आ जाती है तो उसके बाद कार्यालय में बैठना मुश्किल हो जाता है। जल्द से जल्द ब्लड बैंक पहुंचने का प्रयास करते हैं।

# किसी का नाम नहीं पूछते

बनवारी लाल तोदी को कॉल आ जाए तो वो सीधे ब्लड बैंक में पहुंच जाते हैं। कॉल करने वाले से बात करने के बाद कहते हैं कि भाई खून दे दिया है। आप आकर ले जाइये। इसके बाद वो खुद के पैसों से ही जूस मंगवाकर पीते हैं। उनका प्रयास रहता है कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। मन बहुत अच्छा रहता है कि किसी के काम मेरी जिंदगी आ रही है।
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