वेदानन्द ओझा… 

वेदानन्द ओझा… 

धर्म जाना जाता है, माना नहीं जाता। धर्म जिया जाता है, गाया नहीं जाता। धर्म कोई ऐसी स्वीकृति की वस्तु नहीं है जिसको मात्र स्वीकार कर लेने से मनुष्य अपना उत्थान कर सके जब तक कि तदनुसार जीवन जीने की प्रक्रिया को न अपनाये।

Dharma should be known and not accepted. Dharma should be lived, not sung. Dharma is not an object to be accepted and mere acception would not uplift humans unless the humans live their lives in accordance with dharma.

वेदानन्द ओझा
विधानसभा 365 शाहगंज
ग्राम- त्रिकौलिया खुटहन

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