शबनम को फांसी के फंदे पर लटकाने के लिए पूरी तरह से तैयार है पवन जल्लाद

शबनम को फांसी के फंदे पर लटकाने के लिए पूरी तरह से तैयार है पवन जल्लाद

# पवन ने ही निर्भया के दोषियों को दी थी फांसी, आजाद भारत में पहली बार किसी महिला को होगी फांसी

# इंदिरा गांधी के हत्यारों व कुख्यात रंगा बिल्ला को पवन के दादा ने दी थी फांसी

लखनऊ।
विजय आनंद वर्मा
तहलका 24×7
                निर्भया के चारों दरिंदों को फांसी देने वाले पवन जल्लाद ने प्रेमी संग मिलकर सात परिजनों की हत्या करने वाली शबनम को फांसी पर लटकाने के लिए मानसिक रूप से अपने को पूरी तरह से तैयार कर लिया है। पवन जल्लाद ने ही देश को झकझोर रख देने वाले बहुचर्चित निर्भया कांड के दोषियों को फांसी दी थी। पवन कहता है कि यह सपना उसके पिता का था, लेकिन उनको मौका नहीं मिला। उसने अपने दादा कल्लू जल्लाद के साथ फांसी देना सीखा था। निर्भया के हत्यारों को फांसी देने के लिए पवन जल्लाद को तिहाड़ जेल में दो दिन का प्रशिक्षण भी दिया गया था।

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बता दें कि पवन जल्लाद का परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी फांसी देता आ रहा है। पवन के दादा कल्लू और परदादा लक्ष्मण राम परंपरागत फांसी देते थे। कुख्यात रंगा बिल्ला, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह व केहर सिंह को कल्लू जल्लाद ने फांसी दी थी, लेकिन पवन के दादा और परदादा ने एक साथ चार लोगों को फांसी नहीं दी थी। पवन का कहना है कि 1988 में वह अपने दादा के साथ आगरा में गए थे। जहां पर एक अपराधी को फांसी दी थी। प्रदेश में पवन एकमात्र जल्लाद हैं।

# मैं एक बुरी मां हूं, मुझे कभी याद मत करना…

प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही परिवार के सात सदस्यों का कत्ल करने वाली शबनम की हैवानियत सुर्खियों में है। बुलंदशहर के एक दंपती ने इंसानियत दिखाते हुए शबनम के उस मासूम को अपनाया, जिसे कोई गोद लेना तो दूर देखना भी नहीं चाहता था। जेल में पैदा हुए शबनम के इस बेटे की अब यह दंपती परवरिश कर रहा है। लड़का एक स्कूल में छठी में पढ़ रहा है। बच्चा दंपती को छोटी मम्मी-पापा कहता है। 13 दिसंबर 2008 को शबनम ने मुरादाबाद की जेल में बेटे को जन्म दिया था। कुछ दिन पहले ही दंपती उसे रामपुर जेल में बंद शबनम से मिलवाने ले गया था। जब मां ने बेटे को देखा तो फफक कर रोने लगी और काफी देर तक शबनम बेटे से लिपटकर रोती रही। शबनम बेटे से बार-बार कह रही थी कि पढ़-लिखकर अच्छा इंसान बनना। मैं एक बुरी मां हूं इसलिए मुझे कभी याद मत करना।

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# बुलंदशहर के दंपती को सौंपा गया था बच्चा…

शबनम का बेटा 6 साल 7 माह और 21 दिन मां के साथ जेल में रहा था। बाल कल्याण समिति ने बच्चे की अच्छी परवरिश को लेकर 30 जुलाई 2015 को उसे बुलंदशहर के इस दंपती को सौंप दिया था। तब से बच्चा परिवार का हिस्सा है। शबनम यूपी के अमरोहा जिले के बावनखेड़ी गांव की रहने वाली है। उसने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर माता-पिता सहित सात लोगों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी। इस वारदात को 14 और 15 अप्रैल 2008 की रात को अंजाम दिया गया था।
Feb 18, 2021

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