सात परिजनों की हत्यारिन शबनम की फांसी का मामला…

सात परिजनों की हत्यारिन शबनम की फांसी का मामला…

# मीडिया की सुर्खी बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के दो वकील आए पैरवी में, राष्ट्रपति को फिर भेजी गई दया याचिका

# बेटे ने भी कहा- मेरी मां को फांसी न दें, मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं…

लखनऊ।
विजय आनंद वर्मा
तहलका 24×7
                आजाद भारत में पहली बार किसी महिला को फांसी देने की बात चल रही है, यूपी के अमरोहा ज‍िले की शबनम का अपराध ऐसा है कि अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट में इस सजा के खिलाफ पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद शबनम ने राष्‍ट्रपति के समक्ष दया की अपील की थी जिसे भी नामंजूर किया जा चुका है। शबनम को घर के सात सदस्‍यों की बर्बरतापूर्वक हत्‍या करने का दोषी ठहराया गया है, प्रेम संबंधों का विरोध करने पर बौखलाई इस युवती ने अपने परिवार को लोगों को पहले धोखे के साथ बेहोश करने की दवा खिलाई और बाद में नृशंसतापूर्वक कुल्‍हाड़ी से काटकर हत्‍या कर दी।

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अब शबनम के बेटे ने अपनी मां के लिए गुहार लगाई है, फांसी की संभावनाओं के बीच उनके बेटे ताज ने राष्ट्रपति से अपनी मां की फांसी की सजा को माफ करने की अपील है। शबनम के बेटे ने एक न्यूज एजेंसी से कहा- मेरी राष्ट्रपति जी से अपील है कि मेरी मां को फांसी न दें, मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं। शबनम के अपराध को जघन्‍य मानते हुए अमरोहा जिला न्‍यायालय ने वर्ष 2010 में उसे फांसी की सजा सुनाई थी, हाईकोर्ट ने भी इस सजा की पुष्टि की थी। इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2015 में खारिज कर दिया था, बाद में राष्‍ट्रपति की ओर से भी 11 अगस्‍त 2016 को की दया याचिका को ठुकरा दिया गया था। महिलाओं को फांसी देने का इंतजाम केवल यूपी की मथुरा जेल में है। वहां फांसी देने की तैयारी तेज कर दी गई है, फांसी देने के लिए मेरठ से पवन जल्‍लाद को बुलाया गया है।

# कुछ दिन के लिए टल सकती है शबनम की फांसी…

शबनम की फांसी कुछ दिन के लिए टल सकती है, आजादी के बाद पहली बार किसी महिला को फांसी होने का मामला मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के दो अधिवक्ता उसकी पैरवी में आ गए हैं। उन्होने शबनम की तरफ से राष्ट्रपति को नए सिरे से फांसी माफी करने के लिए दया याचिका भेजी है। शुक्रवार को रामपुर जेल प्रशासन ने प्रमुख सचिव न्याय लखनऊ और जिला जज अमरोहा को फ्रेश दया याचिका भेज दी है, दो स्पेशल मैसेंजर के जरिए यह पैगाम पहुंचाया गया है। शबनम जुलाई 2019 से रामपुर जेल में बंद है। दो अधिवक्ताओं श्रेया रस्तोगी और विवेक जैन ने रामपुर जिला कारागार के जेल अधीक्षक पीडी सलौनिया से मुलाकात की थी। अधिवक्ताओं ने शबनम की दया याचिका उन्हेंं सौंपी दी है, जेल अधीक्षक ने बताया कि शबनम की याचिका राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजी जाएगी। यहां से याचिका स्पेशल मैसेंजर के जरिए प्रमुख सचिव न्याय लखनऊ और जिला जज अमरोहा को भिजवा दी गई है।

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# इन परिजनों को शबनम ने मौत के घाट उतारा था…

जेल अधीक्षक ने बताया कि उन्होने याचिका को पढ़ा तो नहीं है, लेकिन शबनम के अधिवक्ताओं से बातचीत में पता चला है कि उन्होने महिला होने का प्रमुखता से हवाला देते हुए कहा है कि आजाद भारत में अभी तक किसी महिला को फांसी नहीं दी गई है। इसके अलावा जेल में उसके अच्छे आचरण, सुधारवादी रवैये और अपने बच्चे के लिए मां की जरूरत को भी आधार बनाया है। शबनम ने 14 अप्रैल 2008 की रात प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने पिता मास्टर शौकत अली, मां हासमी, भाई अनीस व राशिद, भाभी अंजुम, भतीजे अर्श और फुफेरी बहन राबिया की कुल्हाड़ी से गर्दन काटकर हत्या कर दी थी। इसी बीच क्षेत्र में यह भी चर्चाएं होने लगी हैं कि शबनम की फांसी के बाद शौकत अली की लाखों की संपत्ति का वारिस कौन होगा। अधिवक्ताओं का मानना है कि शबनम की फांसी के बाद शौकत अली की संपत्ति का वारिस शबनम का बेटा ताज नहीं हो सकता।

# किसे मिलेगी शबनम के पिता की संपत्ति…

हालांकि फांसी की अभी तिथि निश्चित नहीं है परंतु शबनम के पिता स्वर्गीय शौकत अली की संपत्ति की विरासत के संबंध में अनेक कानूनी पहलुओं पर चर्चा हो रही है। स्वर्गीय शौकत अली के पास बेशकीमती बाग एवं कोठी बनी हुई है। अधिवक्ता परिषद के तहसील समन्वयक एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अमरोहा के पैनल लायर सुमित कुमार गुप्त एडवोकेट का कहना है कि कहा शबनम अपने पिता शौकत अली एवं परिवार के सात सदस्यों की हत्या करने के बाद उनकी संपत्ति की वारिस नहीं हो सकती। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 114 (ग) में स्पष्ट उल्लेख है कि कोई व्यक्ति जो किसी भूमिधर या आसामी की हत्या कर देता है या ऐसी हत्या किए जाने के लिए दुष्प्रेरित करता है वह किसी जोत में मृतक के हित को उत्तराधिकार में प्राप्त करने के लिए अयोग्य हो जाएगा। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता धारा 114 ( घ)में वर्णित है कि यदि कोई व्यक्ति खंड (ग) के अधीन किसी भूमिधर या आसामी के जोत में हित को उत्तराधिकार में प्राप्त करने के लिए अयोग्य हो जाए, तो ऐसे हित का इस प्रकार न्यागमन हो जाएगा। ऐसी दशा में शबनम को फांसी दिए जाने के उपरांत उसका पुत्र ताज, मृतक शौकत अली की संपत्ति का उत्तराधिकारी नहीं बन सकता। अधिवक्ता का कहना है कि स्वर्गीय शौकत अली की संपत्ति का वारिस कौन होगा। यह फैसला कोर्ट अपने विवेक के अनुसार ले सकता है।

 

# पवन जल्लाद का वेतन है 7 हजार 500 रुपए…

निर्भया कांड के दोषियों को फांसी देने वाले पवन जल्लाद शबनम को फांसी देंगे। अपराधियों को फांसी देने वाले पवन जल्लाद का वेतन 7 हजार 500 रुपए है, पवन जल्लाद ने कहा कि उनकी वेतन को बढ़ाया जाना चाहिए। पवन जल्लाद का कहना है कि उसके परिवार में सात बच्चे हैं, मुझे सिर्फ 7 हजार 500 रुपए मिलते हैं, फांसी देने पर बहुत कम मेहनताना मिलता है। अब समय आ गया है उसकी सैलरी को बढ़ाया जाना चाहिए। पवन जल्लाद ने कहा कि वो अपनी विरासत से पीछे नहीं हटे हैं। पवन ने कहा कि पुरूष और महिलाओं को फांसी देने में कोई अंतर नहीं है, वे लगभग 1 साल पहले मथुरा जेल गए थे, जो कमियां थीं मथुरा के जेल अधिकारियों को बताईं थी। इसी के बाद बिहार के बक्सर जेल से रस्सी के लिए ऑर्डर दिया गया था।

# मुख्यमंत्री मायावती के सामने खूब रोई थी शबनम…

अमरोहा के हसनपुर के बावनखेड़ी नरसंहार ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। एक परिवार के सात लोगों की गला रेतकर हत्या की खबर सुनकर सूबे की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने बावनखेड़ी का दौरा किया था। उन्होने घटनास्थल का मौका मुआयना करने के साथ, शबनम को ढांढस बंधाते हुए पुलिस प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली थी। इसके अलावा लोगों के आक्रोश को शांत करने के लिए सभा को संबोधित कर अफसरों द्वारा हसनपुर के प्रभारी निरीक्षक बाबूराम सागर, हल्का दारोगा करन सिंह व बीट के कांस्टेबल विजयपाल व ताहिर रजा को निलंबित करने की जानकारी दी थी। मायावती मुआवजे की भी घोषणा करने वालीं थीं रही थी लेकिन, इसी बीच अधिकारियों ने उनके कान में बता दिया था कि घटना में शबनम का हाथ होने की बात सामने आ रही है। उधर घर पर मुख्यमंत्री मायावती को देखकर शबनम ने उनके सामने खूब रोते हुए आंसू भी बहाए थे।
Feb 20, 2021

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