सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- लखीमपुर हिंसा में कितनी लोगों की हुई गिरफ्तारी

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- लखीमपुर हिंसा में कितनी लोगों की हुई गिरफ्तारी

# यूपी सरकार स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करे, कल फिर होगी मामले की सुनवाई

# जनहित याचिका पर होगी सुनवाई, स्वत: संज्ञान वाली बात गलतफहमी के चलते हुई

लखनऊ/नई दिल्ली।
विजय आनंद वर्मा
तहलका 24×7
             लखीमपुर खीरी में रविवार को हुई हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई, कोर्ट ने इस मामले में यूपी सरकार से स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने सरकार से कल तक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है, इस पर अब कल फिर सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा कि मामले में अभी तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं, कितने आरोपी हैं। इन सब जानकारियों के साथ वो कल रिपोर्ट दाखिल करे।

सुनवाई शुरू होने पर मामले में चिट्ठी डालने वाले वकील शिवकुमार त्रिपाठी ने कोर्ट में कहा कि ‘लखीमपुर खीरी घटना में कई किसान मारे गए हैं, ये प्रशासन की लापरवाही से हुआ है। अदालत इस मामले में उचित कार्यवाही करे, मैं उम्मीद करता हूं कि कोर्ट हमारे लेटर को गंभीरता से लेगी और दोषियों के खिलाफ एक्शन लेगी। ये मानवाधिकार उल्लंघन का मामला है।’ इस पर मुख्य न्यायाधीश ने यूपी सरकार के जवाब मांगा। यूपी सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि ‘ये घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, एसआईटी का गठन किया गया है। एफआईआर दर्ज की गई है, हम रिपोर्ट दाखिल कर सकते हैं.’ इसके बाद कोर्ट ने उसे कल तक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

यूपी सरकार के बयानों पर सीजेआई ने कहा कि ‘लेकिन आरोप ये हैं कि आप जांच सही से नहीं कर रहे। गरिमा प्रसाद ने यूपी की तरफ से कहा, ‘हमने एफआईआर दर्ज कर ली है। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुआई में जांच टीम बना दी है।’ इस पर सीजेआई ने कहा कि ‘कल इस मामले में राज्य सरकार से बात कर निर्देश लेकर आएं और हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर कितनी याचिकाएं दाखिल हुई हैं उनकी तफसील और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें, कितनी एफआईआर, कितने गिरफ्तार, कितने आरोपी सभी कुछ बताएं.’।

सुनवाई शुरू होते ही सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को मामले को जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करने को कहा। चीफ जस्टिस ने कहा कि ‘हमने इस मामले को वकील शिवकुमार त्रिपाठी और सीएस पांडा की चिट्ठी पर दर्ज किया है, हमने इसे जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करने को कहा था लेकिन कुछ कंफ्यूजन से ये स्वतः संज्ञान के तौर पर दर्ज हो गया.’ कोर्ट ने दोनों वकीलों को पेश होने को कहा है। प्रधान न्‍यायधीश एन वी रमना की बेंच यह सुनवाई कर रही है। रमना के अलावा जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली भी बेंच में शामिल हैं।
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