सुल्तानपुर : प्रभु श्रीराम ऋषि संस्कृति के प्रतीक, तो सीताजी कृषि संस्कृति की प्रतीक- डॉ मदन मोहन मिश्र

सुल्तानपुर : प्रभु श्रीराम ऋषि संस्कृति के प्रतीक, तो सीताजी कृषि संस्कृति की प्रतीक- डॉ मदन मोहन मिश्र

कादीपुर।
मुन्नू बरनवाल
तहलका 24×7
               प्रभु श्रीराम ऋषि संस्कृति के प्रतीक हैं, क्योंकि उनका आगमन यज्ञ प्रक्रिया से हुआ सीता जी कृषि संस्कृति की प्रतीक हैं, क्योंकि उनका आगमन राजा जनक के हल चलाने से हुआ। उक्त बातें धर्मनपुर में आयोजित तीन दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के समापन दिवस पर बतौर मुख्य वक्ता डॉ मदन मोहन मिश्र मानस कोविद जी व्यक्त कर रहे थे।डा. मिश्रा ने आगे कहा कि जब जीव रूपी पिता वर के चरण को धोता है तो अहंकार समाप्त होता है और ममता रूपी बेटी का हाथ नारायण स्वरूप वर के हाथ में समर्पित करता है तो ममता समर्पित होती है।

आहमता और ममता दोनों जब नारायण स्वरूप वर के चरणों में समर्पित हो जाती है तो जीव को ब्रह्म साक्षात्कार हो जाता है। प्रतापगढ़ से पधारे पंडित आशुतोष द्विवेदी जी ने कहा कि नए लोगों के जुड़ने के बाद हमें अपने पुराने लोगों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। प्रभु श्रीराम ने शत्रु के भाई विभीषण की सलाह को प्राथमिकता दी जो कार्य का श्रेय स्वयं लेना चाहता है वहीं रावण है और जो कार्य का श्रेय औरों को देता है वहीं प्रभु श्रीराम है। प्रभु श्रीराम ने अपने व्यवहार के बल पर समाज में समरसता स्थापित की। प्रभु श्रीराम ने अपने व्यवहार से रावण के दूतों का हृदय परिवर्तित कर दिया।परमात्मा निर्मल मन वाले को सहज ही प्राप्त हो जाता है। इसलिए व्यक्ति को सत्संग के सरोवर में स्नान करके अपने मन को निर्मल बनाते रहना चाहिए।

चंद्रकांत मिश्र ने दक्ष यज्ञ चर्चा की। प्रोफेसर सुशील कुमार पांडे ने अपने घरों में अच्छी साहित्य रखने की सलाह दी। मंच का संचालन संकठा प्रसाद सिंह देव ने किया। मौनी बाबा की उपस्थिति आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने श्रीराम के जीवन का विस्तृत वर्णन किया। इस अवसर पर प्रमोद मिश्र, जय प्रकाश तिवारी, पं. सत्येन्द्र दूबे, सर्वेश मिश्र, राजमणि वर्मा, अशोक कुमार पाण्डेय, अमृत लाल अग्रहरि, अनिल कुमार पाण्डेय सहित हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे। सभी विद्वानों का स्वागत आकाशवाणी दूरदर्शन कलाकार राहुल पांडे ने किया।

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