हाईकोर्ट के पूर्ण लाॅकडाउन के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

हाईकोर्ट के पूर्ण लाॅकडाउन के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

# हाईकोर्ट को पक्षकार बनाए जाने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी, अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद

# यूपी सरकार का निर्णय, अब वीकेंड कर्फ्यू लगेगा, शनिवार और रविवार दो दिन की रहेगी बंदी

# शुक्रवार रात 8 बजे से सोमवार सुबह 7 बजे तक रहेगा वीकेंड कर्फ्यू

लखनऊ/नई दिल्ली।‌
विजय आनंद वर्मा
तहलका 24×7
                  कोविड-19 के बढ़ते मामलों के मद्देनजर लखनऊ सहित पांच जिलों में संपूर्ण लॉकडाउन लगाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को उत्तर प्रदेश सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर आज ही सुनवाई हुई और शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। वहीं इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज टीम-11 के अधिकारियों के साथ वर्चुअली बैठक में निर्णय लिया कि यूपी में अब वीकेंड लाॅकडाउन लागू होगा, यानि कि अब रविवार के साथ ही शनिवार को भी बंदी रहेगी। यूपी के जिन शहरों में 500 से ज्यादा केस हैं, वहां शुक्रवार की रात 8 बजे से वीकेंड कर्फ्यू लागू होगा जो सोमवार की सुबह 7 बजे तक लागू रहेगा। बाकी पूरे यूपी में अगले आदेश तक पूर्व की भांति रोज नाइट कर्फ्यू जारी रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जिरह की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट को पक्षकार बनाने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि कहा हाईकोर्ट को प्रतिवादी की लिस्ट से हटाया जाए। वकील तुषार मेहता ने कहा कि राज्य सरकार ने कोरोना संक्रमण को लेकर कई कदम उठाए हैं और कई कदम उठाए जाने हैं। हाईकोर्ट के 5 शहरों मे लॉकडाउन का फैसला सही नहीं है, इससे प्रशासन को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। इसके बाद कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार से दो हफ्ते के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा है।

# सरकार ने कार्यपालिका में बताया दखल…

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में दखल है। कोरोना वायरस संक्रमण पर काबू पाने के लिए सरकार पहले ही अपनी तरफ से जरूरी कदम उठा रही है।राज्य सरकार का कहना था कि लॉकडाउन का फैसला करने का अधिकार राज्य सरकार के अधीन है। लॉकडाउन लगाने से पहले बहुत सारी चीजों का ध्यान रखना होता है, ऐसे में कोर्ट को नीतिगत फैसले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

Apr 20, 2021

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