हिंदू धर्म ग्रंथ का सार त्याग, बलिदान और अहिंसा पर टिका- जगद्गुरु परमहंस

हिंदू धर्म ग्रंथ का सार त्याग, बलिदान और अहिंसा पर टिका- जगद्गुरु परमहंस

खुटहन।
मुलायम सोनी
तहलका 24×7
            अयोध्या के तपस्वी की छावनी के पीठाधीश्वर जगदगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि रामायण और गीता का अध्ययन करने वाला सदैव देशभक्त और संस्कारवान बनता है यही हमारे सनातन धर्म को मानने वाले तथा अन्य धर्मावलंबियो में अंतर है। सभी हिंदू धर्म ग्रंथ का सार त्याग, बलिदान और अहिंसा पर टिका हुआ है उक्त बातें जगदगुरु ने रविवार को कस्बे के एक निजी स्कूल पर पत्रकारो से वार्ता करते हुए कही।

उन्होंने वेदों और शास्त्रों का हवाला देकर कहा कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति धन्य है। जो हमें अहिंसा, एकता और सद्भावना बनाए रखने में प्रेरणापुंज का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि मैं अहिंसा परमो धर्मः के सिद्धांत को वहीं तक मानता हूं, जहां तक धर्म की रक्षा बगैर शस्त्र के हो सके धर्म की रक्षा के लिए की गई हिंसा सर्वश्रेष्ठ धर्म है।

श्री आचार्य ने मुसलमानों पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि वे तेजी से देशद्रोही और आतंकवादी बन रहे है। इसे हम ही नहीं मुस्लिम विदुषी सुप्रसिद्घ लेखिका तस्लीमा नसरीन ने भी स्वीकार किया है। उनका मानना है कि जो कट्टरता करना शुरू कर दिया दे तो समझ लेना चाहिए कि वह बहुत जल्द आतंकवाद का हिमायती बनेगा। इनके अलावा सिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने भी कहा है कि कुरान की आयतों को पढ़कर मुसलमान आतंकी बनते है। जगदगुरु ने कहा कि देश के सभी नागरिक चाहे वह मुसलमान हो या हिन्दू सिर्फ गीता और रामायण का मन से एक बार अध्ययन कर ले वह देश भक्त के साथ साथ भय और भ्रष्टाचार से मुक्त हो जायेगा।
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