हैरतअंगेज ! नदी में डूबे बच्चे ने पड़ोसी गांव में लिया पुनर्जन्म

हैरतअंगेज ! नदी में डूबे बच्चे ने पड़ोसी गांव में लिया पुनर्जन्म

# पिछले जन्म की बातें सुन हर कोई हैरान, मां-पिता को भी पहचाना

मैनपुरी।
तहलका 24×7
              विज्ञान के इस दौर में पुनर्जन्म पर यकीन तो नहीं होता लेकिन एक 8 वर्षीय बालक के दावे ने सभी को चकित कर दिया है। एक बालक की 4 मई 2013 को नदी में डूबने से मौत हो गई थी। मौत के चार माह बाद पास के ही गांव में बच्चे ने फिर से जन्म ले लिया। उसने पिछले जन्म की बातें बतानी शुरू किया तो हर कोई हैरान रह गया। दो दिन पहले बालक अपने पूर्व जन्म से जुड़े परिजनों से मिलने पहुंचा और मां-पिता को देखकर तत्काल पहचान लिया। जैसे-जैसे लोगों को बालक के पुनर्जन्म की बातें पता चली वहां ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई।

मामला औंछा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। दो दिन पूर्व नगला सलेही के निकट नगला अमर सिंह निवासी रामनरेश शंखवार अपने 8 वर्षीय बेटे चंद्रवीर को लेकर पड़ोसी ग्राम नगला नगरिया निवासी प्रमोद कुमार के घर पहुंचे। चंद्रवीर ने जैसे ही प्रमोद को देखा वह उनसे लिपट गया। पास में ही उनकी पत्नी ऊषा आयीं तो चंद्रवीर ने उन्हें मां बताकर उनके पैर छुए। चंद्रवीर ने जानकारी दी कि वह प्रमोद का बेटा रोहित है। 8 वर्ष पूर्व भैंस चराने वह नदी के किनारे गया था। जहां भैंस नदी में चली गई तो उसे निकालने के चक्कर में रोहित डूब गया और उसकी मौत हो गई। चंद्रवीर ने बताया कि अब उसका दूसरा जन्म हुआ है। पुनर्जन्म की इस कहानी की खबर आग की तरह फैली और दर्जनों ग्रामीण मौके पर जमा हो गए।

# चार साल की उम्र से ही बताने लगा कहानी

नगला अमर सिंह निवासी रामनरेश ने बताया कि जब वह चार साल का था तभी से ही वह घर से भागने की कोशिश करता था। परिवार या मोहल्ले के लोग उसे मजाक में परेशान करते तो वह अपने घर जाने की बात कहने लगता था। रामनरेश ने बताया कि पिछले दिनों वह बुढर्रा में बाल कटवाने गए जहां प्रमोद से मुलाकात हो गई। तब उन्होंने रोहित और चंद्रवीर के पुनर्जन्म का जिक्र किया।

# बड़ा पुत्र भी पुनर्जन्म से है जुड़ा

रामनरेश और उसकी पत्नी का कहना था कि उसका बड़ा पुत्र भी अपने पुनर्जन्म की कहानी बताता था इसलिए डर के चलते पिछले चार साल से वह चंद्रवीर की कहानी छिपाए रहा। लेकिन दो दिन पहले चंद्रवीर ने जिद की तो वह उसे लेकर नगला नगरिया पहुंच गया।

पुनर्जन्म के रोहित के पिता प्रमोद और उनकी पत्नी ऊषा कहती हैं कि चंद्रवीर ने रोहित की मौत की यादें ताजा कर दीं, मन दुखी हो गया है। उनका बेटा तो चला गया था अब चंद्रवीर दूसरे की अमानत है। परिवार के लोग तो खुश हैं उन्हें भी खुशी है। लेकिन वे चाहते हैं कि अब चंद्रवीर का रिश्ता उनके परिवार से भी बना रहे।
उधर रामनरेश के घर में चंद्रवीर के पुनर्जन्म की कहानी को लेकर चर्चाएं हैं। गांव के लोग भी इस कहानी पर बात कर रहे हैं। चंद्रवीर की मां कहती हैं कि भले ही कोई कहानी हो लेकिन वे अपने बेटे को किसी को नहीं देंगी। वे चाहती हैं कि चंद्रवीर अपने पुराने मां-बाप के घर आ जा सकता है इस पर उन्हें कोई ऐतराज नहीं है।
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