होली के त्यौहार का विराट समायोजन.. बदलते परिवेश में विविधताओं का बन गया है संगम- डॉ सौरभ

होली के त्यौहार का विराट समायोजन.. बदलते परिवेश में विविधताओं का बन गया है संगम- डॉ सौरभ

# होली भी एक ऐसा त्यौहार जो धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों प्रकार से रखता है महत्व- सोनम गुप्ता

स्पेशल डेस्क।
विचारमंथन
तहलका 24×7
                  प्राचीन काल से ही प्रियजनों को रंगीन माहौल से सराबोर करने की परंपरा है, जो वर्षों से चली आ रही है। यह उत्सव प्रसन्नता का मिल बांटने का एक अपूर्व अवसर होता है। भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां पर मनाएं जाने वाले सभी त्योहार, समाज में मानवीय गुणों को स्थापित करके लोगों में प्रेम एकता एवं सद्भावना को बढ़ाते हैं, यहां मनाएं जाने वाले सभी त्योहारों के पीछे की भावना मानवीय गरिमा को समृद्धि प्रदान करना होता है।

यही कारण है कि भारत में मनाएं जाने वाले त्योहार सभी धर्मों के लोग आदर के साथ मिल जुलकर मनाते हैं। होली का आगमन बसंत ऋतु की शुरुआत के आस पास होता है, जब शरद ऋतु को अलविदा कहा जाता है और उसका स्थान बसंत ऋतु ले लेती है, इन दिनों हल्की-फुल्की बयारें चलने लगती हैं, यह मौसमी बदलाव हर एक व्यक्ति के मन में सहज प्रसन्नता पैदा करती है, इससे सामाजिक समरसता के भाव भी विद्यमान होते हैं, होली के त्यौहार के विषय में सर्वाधिक प्रसिद्ध कथा प्रह्लाद तथा होलिका के संबंध में भी है, होली का त्यौहार असत्य पर सत्य का विजय और दुराचार पर सदाचार की विजय का प्रतीक है। होली जैसे त्योहार में अमीर गरीब छोटे-बड़े ब्राह्मण, शुद्र आदि सब का भेद मिट जाता है। तब ऐसी भावना करनी चाहिए कि होली की अग्नि में हमारी समस्त पीड़ा, दुख चिंताएं द्वेष भाव आदि जल जाएं, तथा जीवन में प्रसन्नता, हर्ष उल्लास तथा आनंद का रंग बिखर जाए, होली रंगों का त्योहार है, हंसी खुशी का त्योहार है, इसलिए होली समरसता के साथ मनाना चाहिए।
Mar 28, 2021

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