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Friday, January 30, 2026

पनीर कैसे पहचानें कि असली है या नकली …..

पनीर कैसे पहचानें कि असली है या नकली …..

डा. आलोक सिंह पालीवाल
तहलका 24×7 विशेष
                      भारत में दूध और उससे बने उत्पादों का उपयोग प्राचीन काल से होता आ रहा है। दूध को सम्पूर्ण आहार कहा गया है, क्योंकि इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, वसा, विटामिन और खनिज तत्वों का संतुलित रुप से समावेश होता है। दूध से बनने वाले अनेक उत्पादों में पनीर का विशेष स्थान है। पनीर भारतीय भोजन का अभिन्न अंग बन चुका है, जो न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि पौष्टिक भी होता है। इसे बच्चे, बूढ़े, युवा सभी बड़े चाव से खाते हैं।
परंतु आज के समय में बाजार में मिलावटी और नकली पनीर की भरमार ने लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर दिया है। जब भी उपभोक्ता दूध या पनीर खरीदता है, तो उसे यह भरोसा नहीं होता कि जो उत्पाद वह ले रहा है वह असली है या नकली। यही कारण है कि अब असली और नकली पनीर की पहचान करना बहुत आवश्यक हो गया है।आज के समय में नकली पनीर बनाने के कई तरीके चलन में हैं। असली पनीर तैयार करने के लिए दूध को उबालकर उसमें नींबू का रस, सिरका या किसी अम्लीय पदार्थ की कुछ बूंदें डालकर फाड़ा जाता है।
इससे दूध का दही और पानी अलग हो जाता है। इस दही को छानकर ठंडा कर लिया जाता है, फिर दबाकर पनीर का ठोस रुप बना लिया जाता है। इस प्रक्रिया में केवल शुद्ध दूध और अम्लीय पदार्थों का प्रयोग होता है। जबकि नकली पनीर या तो वनस्पति घी, सिंथेटिक फैट, डिटर्जेंट या स्टार्च से बनाया जाता है ताकि दिखने में यह असली पनीर जैसा लगे। कई बार इसमें यूरिया, साबुन या सस्ते पाउडर दूध का उपयोग भी किया जाता है, जिससे लागत कम हो जाए और मुनाफा बढ़े। यही मिलावट मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है।
असली और नकली पनीर के बीच सबसे बड़ा अंतर उसकी बनावट, स्वाद और गंध में दिखाई देता है।असली पनीर हल्का मुलायम, नम और दूध की खुशबू वाला होता है। जब आप उसे दबाते हैं तो उसमें से हल्का सा पानी निकलता है और वह अपनी पुरानी स्थिति में लौट आता है। जबकि नकली पनीर या तो बहुत सख्त होता है या फिर रबड़ जैसा खिंचाव लिए होता है। उसे दबाने पर नमी नहीं निकलती बल्कि चिकनापन महसूस होता है। कई बार यह हाथों में चिपकता भी है।
यदि आप पनीर को पानी में डालकर जांचें तो भी फर्क आसानी से समझ में आता है। असली पनीर को गर्म पानी में डालने पर वह अपना आकार बनाए रखता है, केवल हल्का मुलायम होता है। नकली पनीर पानी में डालने पर धीरे-धीरे बिखरने लगता है या उसमें से सफेद झाग निकलने लगते हैं क्योंकि उसमें रासायनिक या स्टार्च पदार्थ मिले होते हैं।इसी तरह जब आप पनीर को गर्म तवे पर रखें तो असली पनीर हल्का सुनहरा होकर तेल छोड़ने लगता है, वहीं नकली पनीर जलने या काला पड़ने लगता है और उसमें से कोई तेल नहीं निकलता।
एक आसान वैज्ञानिक तरीका यह भी है कि यदि आपको आयोडीन या बेथाडीन जैसी कोई लाल स्याही मिले तो उससे भी परीक्षण किया जा सकता है। पनीर का एक छोटा टुकड़ा लें और उस पर कुछ बूंदें आयोडीन की डालें। अगर रंग नीला या काला हो जाए तो समझ लें कि उसमें स्टार्च मिला हुआ है, यानी पनीर नकली है। अगर रंग में कोई बदलाव न हो तो वह असली पनीर है। यह घरेलू तरीका बहुत विश्वसनीय और सरल है जिसे कोई भी व्यक्ति घर पर कर सकता है।
असली पनीर की गंध दूध जैसी ताजी और सौम्य होती है, जबकि नकली पनीर से हल्की केमिकल या साबुन जैसी गंध आती है। स्वाद से भी पहचान की जा सकती है। असली पनीर हल्का मीठा, ताजगी भरा और मुंह में घुल जाने वाला होता है। नकली पनीर अक्सर बेस्वाद, खट्टा या हल्का कड़वा लगता है।पनीर के असली या नकली होने की पहचान केवल स्वाद या जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध हमारे स्वास्थ्य से भी है।नकली पनीर में डिटर्जेंट या यूरिया जैसे तत्व पाए जाते हैं जो पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं।
लंबे समय तक ऐसे पदार्थों का सेवन करने से लीवर, किडनी और हृदय संबंधी बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं। यूरिया शरीर में विषाक्त प्रभाव पैदा करता है, जिससे शरीर में थकान, उल्टी, अपच और सिरदर्द जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। मिलावटी पनीर में इस्तेमाल होने वाले सिंथेटिक फैट और सस्ते केमिकल्स शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा देते हैं, जिससे मोटापा और हृदय रोगों का खतरा भी बढ़ता है।आज के उपभोक्ता को समझना होगा कि सस्ता पनीर हमेशा लाभदायक नहीं होता। असली दूध से बना पनीर थोड़ा महंगा अवश्य होता है, लेकिन वह शरीर के लिए लाभकारी है।
यदि कोई दुकानदार बहुत कम दाम में पनीर बेच रहा है, तो यह संदेह का कारण है। असली दूध की कीमत को देखते हुए सस्ता पनीर अक्सर मिलावटी होता है। इसलिए खरीदते समय हमेशा विश्वसनीय डेयरी, ब्रांडेड पैकिंग या प्रमाणित विक्रेता से ही पनीर लेना चाहिए।खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर जांच की जाती हैं और मिलावटी पनीर बेचने वालों पर कार्रवाई की जाती है। लेकिन जब तक उपभोक्ता स्वयं सतर्क नहीं रहेगा, तब तक ऐसी मिलावट पर रोक लगाना कठिन है।
इसलिए जरुरी है कि हर व्यक्ति को पनीर की पहचान करने के सरल घरेलू उपायों की जानकारी हो। यह न केवल उसकी खुद की सेहत की सुरक्षा करेगा बल्कि बाजार में मिलावटखोरी को भी हतोत्साहित करेगा।पनीर भारतीय रसोई का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे अनेक व्यंजन बनते हैं जैसे पनीर भुर्जी, पनीर टिक्का, शाही पनीर, मटर पनीर आदि। इन व्यंजनों का स्वाद तभी वास्तविक होता है जब पनीर शुद्ध हो। वहीं नकली पनीर न केवल स्वाद को खराब करता है बल्कि खाना भी अस्वस्थ बना देता है।
आजकल तो शादी समारोहों, होटलों और मिठाई की दुकानों में बड़े पैमाने पर नकली पनीर का उपयोग होने लगा है, क्योंकि इससे लागत घट जाती है। यह प्रवृत्ति समाज व स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक है।यदि कोई व्यक्ति चाहे तो घर पर भी बहुत आसानी से शुद्ध पनीर बना सकता है। इसके लिए बस ताजा दूध को उबालें, फिर उसमें नींबू का रस या सिरका डालकर फाड़ लें। जब दूध फट जाए तो उसे मलमल के कपड़े से छानकर पानी अलग कर दें। इस दही को कपड़े में लपेटकर थोड़ी देर दबा दें, कुछ घंटों बाद ठंडा कर लें। इस तरह आपको पूरी तरह शुद्ध, बिना मिलावट का पनीर मिल जाएगा।
घर का पनीर ताजा, पौष्टिक और सुरक्षित होता है। आज के युग में जब हर वस्तु में मिलावट का खतरा है, तो हमें जागरुक उपभोक्ता बनना होगा। केवल सरकारी जांच या कानूनी कदम पर्याप्त नहीं हैं। हर व्यक्ति को अपने स्तर पर सचेत रहना चाहिए। जब उपभोक्ता स्वयं नकली उत्पादों को खरीदना बंद करेगा तभी मिलावटखोरों पर लगाम लगेगी।पनीर जैसे उत्पाद के माध्यम से हम यह समझ सकते हैं कि खाद्य सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। जब लोग खुद जांच करना, पहचानना और समझना शुरु करेंगे तो धीरे-धीरे बाजार में शुद्धता की मांग बढ़ेगी और मिलावटखोरी स्वतः कम हो जाएगी।
असली पनीर हमारी सेहत, स्वाद और संस्कृति से जुड़ा है। यह भारतीय खानपान की पहचान है, जिसे हमें मिलावट से बचाना चाहिए। यदि हम सतर्क रहें, पनीर की पहचान के इन सरल उपायों को अपनाएं और शुद्ध वस्तु खरीदें, तो न केवल अपना बल्कि समाज का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहेगा। असली और नकली पनीर की पहचान के ये छोटे-छोटे कदम एक बड़े परिवर्तन की ओर बढ़ा सकते हैं।मिलावटी पनीर भले ही दिखने में सुंदर लगे, पर उसकी वास्तविकता बहुत खतरनाक है। यह हमारी प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकता है, बच्चों की वृद्धि पर असर डाल सकता है और दीर्घकाल में गंभीर बीमारियां उत्पन्न कर सकता है।
इसके विपरीत, असली पनीर न केवल शरीर को प्रोटीन और कैल्शियम देता है बल्कि हड्डियों को मजबूत करता है, मांसपेशियों के निर्माण में सहायता करता है और ऊर्जा प्रदान करता है। इसीलिए कहा जा सकता है कि असली पनीर केवल भोजन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का आधार है।अंततः यह कहा जा सकता है कि असली और नकली पनीर में अंतर पहचानना कठिन नहीं, बस थोड़ी सजगता की आवश्यकता है। यदि हम ध्यान दें, गंध, स्वाद, बनावट और घरेलू परीक्षण के तरीकों को अपनाएं तो आसानी से मिलावट को पहचान सकते हैं।
(लेखक पालीवाल पेट्स कलीनिक एंड सर्जिकल सेंटर के चिकित्सक हैं)

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