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Friday, February 6, 2026

मौत की बारिश 2: ऊर्जा व नगर निकाय मंत्री से मिलेगा जनता के हर सवाल का जवाब! 

मौत की बारिश 2: ऊर्जा व नगर निकाय मंत्री से मिलेगा जनता के हर सवाल का जवाब! 

# पिछले हफ़्ते 25-26 अगस्त को जौनपुर शहर में तीन युवाओं का दिल दहला देने वाली घटना ने यहां के हर बाशिंदे के दिल को छलनी और दिमाग को ऐसा सुन्न कर दिया कि लोग अभी तक नहीं उबर सके हैं, यदि किसी की सेहत पर फर्क नहीं पड़ा तो वह है प्रशासन का हिस्सा बिजली विभाग व शहरी विकास यानी नगर पालिका

कैलाश सिंह/रुद्र प्रताप सिंह
वाराणसी/जौनपुरl 
तहलका 24×7
               अब तो जौनपुर शहर का हर बाशिंदा आसमानी बौछार पड़ते ही सिहर उठता है, उसे उमसभरी गर्मी बर्दास्त है, लेकिन कड़कती बिजली के साथ तेज वर्षा यानी ‘मौत की बारिश’ से हर किसी के तन में सिहरन दौड़ जाती है, क्योंकि आसमानी बिजली से ज्यादा भय जमीन के ‘करंट और नालों के गड्ढों’ से लगने लगा है।उस घटना के पांच दिन बाद भी करंट सप्लाई करने वाले बिजली के पोल पर पन्नी नहीं चिपकाई जा सकी है।
अलबत्ता नगर पालिका नाले-नालियों से सिल्ट और विद्युत विभाग तारों पर लटकी पेड़ों की टहनियों को काट रहा है। जबकि यह कार्य जून महीने में ही हो जाने चाहिए थे। समूचा मीडिया को सड़कों के हर गड्ढे में मौत नज़र आ रही है।आज शनिवार को तड़के पांच बजे शुरु हुई बादलों की चमक-गरज के साथ तेज़ वर्षा ने एक बार फिर ‘मौत की बारिश’ का एहसास करा दिया है, लेकिन विद्युत विभाग जो 25 अगस्त को हुई घटना से एक घंटे पहले प्रशासनिक बैठक में दावा किया था कि सभी ‘पोल पन्नी से लैस’ यानी सुरक्षित किये जा रहे हैं, वह पांचवें दिन भी नंगे नजर आ रहे हैं।
अब ऊपर से आसमानी बिजली और जमीन पर पोल और टूटे तारों के करंट के बीच फंसा है जन-जीवन। घटना वाले दिन नाले के सीवर वाले मेनहोल में गिरी युवती प्राची मिश्रा खुद बचकर निकल जाती या फिर समीर और शिवा भी बचा लेते लेकिन तीनों को मेनहोल में प्रवाहित करंट ने बेबस यानी ताकत विहीन कर दिया था।अब आता है ‘वही यक्ष प्रश्न: तीन युवाओं की मौत का जिम्मेदार कौन’?
तो मीडिया और पब्लिक की नजर में ये दोषी हैं चार लोग, उनमें नगर पालिका अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी और मुख्य व अधिशासी अभियन्ता विद्युत विभाग। यदि सुश्री मायावती का शासन रहा होता तो शर्तिया इन्हीं लोगों पर बिजली गिरती। इन जिम्मेदारों को छोड़कर मातहतों को हल्के फीते से नाप दिया और कोरम पूरा मान लिया गया। यही कारण है कि पांच दिन बाद भी शहर के गड्ढों और और नंगे खंभे जस के तस हैं।
हां इतना जरुर हुआ कि खेल एवं युवा कल्याण मन्त्री गिरीश चंद्र यादव ने नगर विधायक और यहां के बाशिंदे होने के नाते मृतकों के परिजनों के घर पहुंचे और सांत्वना के साथ शासन के जरिए राहत राशि साढ़े सात-सात लाख दिलाई। पब्लिक की तरफ से मीडिया द्वारा जिन दो विभागों की लापरवाही पर सवाल पूछने हैं उसके लिए जवाबदेह नगर निकाय और ऊर्जा मन्त्री एके शर्मा ही हैं, अब उनका ही जौनपुर आगमन का इंतजार के सिवा कोई चारा नहीं है! वह जौनपुर के प्रभारी मंत्री भी हैं।

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