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Monday, January 19, 2026

सरकारी दवाओं का कब्रिस्तान देखकर प्रशासन के उड़े होश

सरकारी दवाओं का कब्रिस्तान देखकर प्रशासन के उड़े होश

कुशीनगर। 
तहलका 24×7
                   जिले में सरकारी स्वास्थ्य महकमा एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बार करोड़ों रुपये की सरकारी दवाओं को मिट्टी के अंदर दफन किये जाने के मामलों की वजह से चर्चाओं में है। यूं कहें की बातों पर मिट्टी डाले लेकिन यहां तो सरकारी दवाओं पर मिट्टी डाल मामला खत्म करने का प्रयास किया गया है।
बता दें कि कुशीनगर जिले के कसया NH28 हाई-वे पर स्थित जनपदीय ड्रग वेयर हॉउस जो अचानक चर्चाओं में आ गया है। वजह सरकारी दवाओं को जमीन के अंदर दफनाये जाने का है। अब सरकारी दवा जमीन के अन्दर क्यों दफनाई गई यह फिलहाल जांच के बाद साफ हो पायेगा लेकिन पड़ताल में जो मामला सामने आया है वह हैरान करने वाला है। जांच पड़ताल में पाया कि जिन दवाओं को दफन किया गया वह वेलिडिटी दवाएं थी जबकि कुछ एक्सयारी दवाएं थी।
अब दवाओं को बिना सीएमओ की जानकारी में दफना दी गई यह बात हजम होने वाली नहीं है। क्योंकि ड्रग वेयर हाउस पर तैनात फार्मासिस्ट मंतोष पांडेय कुछ लोगों की मदद से इन दवाओं को ठिकाने लगा रहे थे। इन दवाओं को ठिकाने लगाता देख गार्ड ने इसकी जानकारी कुशीनगर सीएमओ सुरेश पटारिया को दी लेकिन सीएमओ गार्ड की बातों को संज्ञान में न लेकर यह होने दिया। नतीजा यह हुआ कि सरकारी दवाएं धीरे-धीरे दफन होती रही।
सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत कोई आम बात नहीं है बल्कि इसके पीछे सोची समझी रणनीति है। गरीब मरीजों को सस्ते दरों पर सेवाएं और मुफ्त में दी जाने वाली दवाएं वैसे तो अस्पतालों में कम ही मिलती है। नतीजतन डॉक्टर बाहर की दवा लिखते है जिस पर हाल ही में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ऐसे डॉक्टरों को बर्खास्त कर चुके है। फिर भी यह व्यवस्था न सुधरे तो कहीं न कहीं कुशीनगर के लाखों करोड़ों रुपये की सरकारी दवाओं को मिट्टी के अंदर दफन किये जाना क्या इत्तेफाक है।
यह प्रकरण उठते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। आनन फानन में कुशीनगर के एडीएम, सीएमओ और कसया एसडीएम के अलावा अन्य अधिकारी बीती देर रात मौके पर पहुंचते है और जांच करते है। लेकिन अंधेरा होने के चलते जांच अधूरी छोड़ अधिकारी जांच टीम बना कर मामले की सुबह जांच करवाने की बात कह चलते बनते हैं।
बता दे कि सरकारी दवाओं को दफनाए जाने पर पर्दा हटाने के लिए जब सीएमओ के साथ अन्य अधिकारी पहुँचते है तो जांच के नाम पर सिर्फ लीपा पोती का खेल शुरू होता है। वैसे ही जैसे सरकारी दवाओं को बिना डर बिना परमिशन के मिट्टी के अन्दर दफनाया गया। खैर यह जांच का विषय है। सवाल यह भी है कि आखिर दफनाई गयी दवा क्या एक्सपायर थी या फिर उन दवाओं की वेलिडिटी थी। फिलहाल दफनाई गई दवा वेलिडिटी वाली थी, जो मरीजों के इलाज में काम आ सकती थी।
लाखों और करोड़ों रुपये की दवा यू मिट्टी के अंदर पाया जाना क्या सच में सरकारी स्वास्थ्य महकमा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मिट्टी में मिलाने में जुटा है। वैसे यूपी के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक जो कि स्वास्थ्य महकमा अपने पास रख कर यूपी में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने को लेकर तमाम प्रयास करते है लेकिन यह तस्वीरें डिप्टी सीएम के किये गए दावों पर मिट्टी डालने के लिए काफी है।

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