पौराणिक व ऐतिहासिकता से समृद्ध शाहगंज अपने धरोहरों के समाप्ति की दहलीज पर…

पौराणिक व ऐतिहासिकता से समृद्ध शाहगंज अपने धरोहरों के समाप्ति की दहलीज पर…

# ख्यातिलब्ध इतिहासकार व तहलका 24×7 के संस्थापक एस. एम. मासूम की बेब़ाक कलम से…

स्पेशल डेस्क।
विचारमंथन
तहलका 24×7
                      वैश्विक पटल पर अपनी अलग पहचान रखने वाला उत्तर प्रदेश का एक ऐसा जिला जिसे नवाबों ने बसाया था ऐसा इतिहासकारों ने अपनी खोज के आधार पर अपनी लेखनी चलाई है। जौनपुर का इतिहास जानने के लिए कई स्रोत है मगर सबसे प्रमाणिक स्रोत जौनपुर नामा माना जाता है। उसी जौनपुर जिले की सबसे समृद्ध तहसील शाहगंज जिसके विषय में बताया जाता है कि इसे नवाब सिराजुद्दौला ने बसाया था और इसी शहर में एक भवन का निर्माण करवाया था जो एराकियाना में बारादरी के नाम से जाना जाता है। आईये जानते हैं इतिहासकार और तहलका 24×7 के संस्थापक सदस्य एस. एम. मासूम की कलम से शाहगंज के इतिहास पर कुछ रोचक तथ्य…

जौनपुर जिले की सबसे बड़ी तहसील शाहगंज भौगोलिक व ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। बौद्ध परिपथ के रूप में इसी नगर से होकर लुम्बिनी-दुद्धी राजमार्ग गुजरता है। स्वतंत्रता संग्राम में यहां के नौजवानों ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। यह नगर चार जिलों का संगम नगर भी है।धार्मिक दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण नगर माना जाता है एक तरफ बाबा भोले नाथ की नगरी काशी हैं तो वहीं दूसरी तरफ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्म स्थली अयोध्या है। शाहगंज नगर के पश्चिमी तरफ जनपद की सीमा पर बि‍जेथुआ महावीर का मंदि‍र है। इस मंदि‍र के बारे में कहा जाता है कि‍ हनुमान जी का पैर धरती में कहां तक है आजतक पता नही लगाया जा सका। मंदिर के ही पास में मकरी कुण्‍ड नामक एक कुण्ड है जिसके विषय में मान्यता है कि जिस समय हनुमान जी लंका से संजीवन बूटी लाने जा रहे थे तो रावण ने कालनेमि नामक राक्षस को हनुमान जी को मारने के लिए भेजा था जिसे हनुमान जी इसी मकरीकुण्ड नामक स्थान पर मारा था इस मकरीकुण्ड का वर्णन रामायण में भी है।
इसी शाहगंज नगर को नवाब सिराजुद्दौला ने बसाया था। शाह हजरत अली के नाम से सिराजुद्दौला ने एक बारादरी और एक ईदगाह का निर्माण भी कराया। इसी नगर के एराकियाना मोहल्ले में बारादरी की एक ऐतिहासिक धरोहर है।बारादरी का अर्थ होता है बारह दरवाजे, इस बारह दरवाजे वाले धरोहर का निर्माण सिराजुद्दौला ने कराया था। जहाँ पर उसके सैनिक किसी जंग पर जातें या जंग से वापस आतें समय ठहरते थे। इसी एतिहासिक भवन के पीछे एक पोखरी भी है। जिसमें संभवतः उसके सैनिक स्नान आदि किया करतें थे। सही रख-रखाव के अभाव में समय के साथ यह ऐतिहासिक भवन जर्जर होता गया। आज यह ऎतिहासिक भवन खंडहर के रूप में कुछ अवशेष रह गया हैं। किसी समय में नवाबों की पसंद रहा शाहगंज नगर में अब एराकियाना मोहल्ले में बदहाल हालत में बारादरी ही नवाबों की निशानी बची है, बाकी कुछ मोहल्लों के नाम जैसे हुसैनगंज, अलीगंज बचे हैं। इसी नगर में शाह का पंजा नामक एक स्थान है जहाँ पर हर बृहस्पतिवार हिन्दू और मुसलमान दोनों दर्शन और पूजन करने आते हैं इसी स्थान पर मुहर्रम मे मुसलमान समुदाय के लोग ताजिया दफन करते हैं। यह स्थान हिन्दू और मुसलमान एकता का एक जीता जागता मिसाल, क्योंकि इस स्थान पर शाहबाबा की जिआरत करने जितने मुसलमान आतें है उससे कही अधिक हिन्दू आते हैं यहाँ पर एक ऐतिहासिक मस्जिद भी है जिसके विषय में बताया जाता है कि इसे नवाबों के समय बनवाया गया था।
इस बार जौनपुर पहुँचने पर शाहगंज में स्थित बारादरी को देखने का इरादा किया और जा पहुंचे शाहगंज के एराक़ियाना मोहल्ले में जिसके बारे में बताया जाता है कि यहाँ लोग इराक़ से आकर आज से लगभग ४-५ सौ वर्ष पहले बस गए थे। वहीं पर एक बदहाल खंडहर नुमा बारादरी दिखाई दी जिसे बाहर से देख के कुछ समझ में आता था कि इसे बारहदरी क्यों कहा गया। इसी बारहदरी से सटा हुआ एक विद्यालय चल रहा था जिसमें बच्चे तालीम ले रहे थे। उस विद्यालय के प्रधानाध्यापक से बात करने पर उन्होंने उस खंडहर के अंदर जाने का दरवाज़ा खुलवाया। अन्दर जाने पर वह बारहदरी कम जंगल ज्यादा नजर आई जहाँ घास जमी हुई थी जो एक जंगल की तरह नज़ारा लग रहा था।

बारादरी को अन्दर और बाहर से देखने पर दिखाई दिया कि इस खंडहर नुमा ईमारत में चारों तरफ तीन तीन दर बने हुए थे, जिसके बारे में वहाँ के लोगों ने बताया की कभी यह बड़े खूबसूरत नक़्क़ाशी वाले दर हुआ करते थे और उन पर मोर इत्यादि के बहुत ही खुबसूरत कामगीरी की हुई थी मगर आज वहाँ सिर्फ एक खंडहर नुमा बदहाल ईमारत दिखाई देती है जिसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। उस खण्डहर नुमा इमारत को देखकर कहा जा सकता है कि आने वाले कुछ समय में नवाबों की यह निशानी भी सिर्फ इतिहास के पन्नों में ही सिमट कर रह जाएगी। इसी के सामने एक मस्जिद और तालाब का भी ज़िक्र हुआ है जहां नवाब सिराजुद्दौला शाहगंज आने पर वहाँ नमाज़ पढ़ते थे और बारादरी में ढहरते थे। जो वर्तमान में अपने बदहाली पर रो रहा है।

Apr 03, 2021

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