जमानत याचिका दाखिल करना पड़ा भारी
# कचहरी में वकील बनाम वकील टकराव, टोलकर्मियों की पैरवी पर भड़के अधिवक्ता, मेज-कुर्सियां फूंकी
बाराबंकी।
तहलका 24×7
हैदरगढ़ टोल प्लाजा पर अधिवक्ता के साथ हुई मारपीट के मामले में टोलकर्मियों की पैरवी करना एक अधिवक्ता को भारी पड़ गया। बाराबंकी जिला न्यायालय परिसर उस समय रणक्षेत्र में बदल गया, जब बार एसोसिएशन के सामूहिक निर्णय के बावजूद एक अधिवक्ता द्वारा आरोपियों की जमानत याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई। नाराज सैकड़ों अधिवक्ताओं ने संबंधित वकील की मेज और कुर्सियों को आग के हवाले कर दिया।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों हैदरगढ़ टोल प्लाजा पर टोल कर्मियों द्वारा एक अधिवक्ता के साथ मारपीट और अभद्रता की घटना हुई थी। घटना के विरोध में लखनऊ और बाराबंकी के अधिवक्ताओं ने संयुक्त रुप से आंदोलन किया था, जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजा था। इसके पश्चात जिला बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर निर्णय लिया था कि कोई भी स्थानीय अधिवक्ता टोलकर्मियों की पैरवी नहीं करेगा और न ही उनकी जमानत याचिका दाखिल करेगा।

अधिवक्ताओं को जानकारी मिली कि बार के निर्णय की अवहेलना करते हुए अधिवक्ता मनोज शुक्ला ने गुपचुप टोलकर्मियों की जमानत याचिका कोर्ट में दाखिल कर दी है। यह खबर फैलते ही अधिवक्ताओं में आक्रोश फैल गया। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में वकील मनोज शुक्ला के बस्ते पर पहुंच गए। उस समय अधिवक्ता वहां मौजूद नहीं थे, जिसके बाद गुस्साए वकीलों ने उनकी मेज और कुर्सियों को बाहर सड़क पर फेंककर आग लगा दी।

हंगामे के दौरान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब पूरे जिले के अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर आरोपियों की पैरवी न करने का निर्णय लिया, तब निजी स्वार्थ में लिया गया यह निर्णय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा मामला अधिवक्ताओं के सम्मान और स्वाभिमान से जुड़ा है। बार के सामूहिक निर्णयों की अनदेखी करने वाले किसी भी अधिवक्ता को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।घटना के बाद कचहरी परिसर में घंटों वकीलों ने एकता के नारे लगाए। स्थिति को देखते हुए पुलिस भी सतर्क रही, हालांकि कोई बड़ी घटना नहीं हुई।








