जौनपुर : डोभी स्टेशन पर सुहेलदेव के ठहराव न होने के विरोध में प्रदर्शन
# ठहराव जल्द नहीं किया गया तो धरना प्रदर्शन को होंगे बाध्य- अजीत सिंह
# नेपाल इंडो मार्ग से महज पचास मीटर दूरी पर स्थित है डोभी रेलवे स्टेशन
चंदवक।
विनोद कुमार
तहलका 24×7
क्षेत्र के डोभी रेलवे स्टेशन पर अचानक सुहेलदेव सुपरफास्ट एक्सप्रेस का ठहराव रोके जाने को लेकर समाजसेवी अजीत सिंह के नेतृत्व में गुरुवार की दोपहर सैकड़ों की संख्या में लोगो ने डोभी रेलवे स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई।बता दें कि गाजीपुर से चल कर सुल्तानपुर, लखनऊ होते हुए आनंद विहार दिल्ली को जाने वाली सुहेलदेव का ठहराव सप्ताह में चार दिन डोभी रेलवे स्टेशन पर ठहराव होता था।

अचानक बुधवार को सुहेलदेव का ठहराव रोक दिया गया। जिसकी जानकारी होते ही क्षेत्रवासियों में रोष का माहौल व्याप्त है।इस बाबत मीडिया से बात करते हुए समाजसेवी अजीत सिंह ने बताया कि डोभी रेलवे स्टेशन चार जिलों को जोड़ता है जिसकी कुल आबादी लगभग सोलह लाख की है।सुहेलदेव के ठहराव से यहां के लोगो को लखनऊ, दिल्ली व अन्य जगहों पर आने जाने में सहूलियत मिलती थी। अब यहां पर सुहेलदेव के ठहराव न होने से लोगो को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

हम सभी लोग इस स्टेशन पर रिजर्वेशन काउंटर की मांग लगातार कर रहे थे पर आलम यह है कि यहां पर चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव को ही रोक दिया जा रहा है। डोभी क्षेत्र की जनता के प्रति सरकार का रवैया इतना उदासीन हो सकता है इसका अंदाजा नहीं था। श्री सिंह ने बताया कि डोभी रेलवे स्टेशन पर टिकट रिजर्वेशन काउंटर के लिए सांसद बीपी सरोज को भी पत्रक दिया गया है। अगर जल्द से जल्द डोभी स्टेशन पर सुहेलदेव का ठहराव दोबारा नहीं किया गया तो हम सभी क्षेत्रवासी धरने प्रदर्शन को बाध्य होंगे।

गौरतलब है कि आजादी के 43 साल पहले यानी 21 मार्च 1904 में अंग्रेजो के समय में डोभी रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया था। डोभी का गौरवपूर्ण इतिहास होने के नाते यह स्टेशन अपने आप में खास था इसी स्टेशन से होकर बड़ी बड़ी हस्तियां देश व विश्व पटल पर जनपद व डोभी की छाप छोड़ने में कामियाब रही है। जिनका गौरवशाली इतिहास पढ़कर व सुनकर गौर महसूस होता है। इसका अंदाजा इसी बात लगाया जा सकता हैं कि डोभी रेलवे स्टेशन से महज पचास मीटर दूरी पर नेपाल इंडो मार्ग पर स्थित है। विरोध प्रदर्शन करने वालो में सोनू राजभर, भगवानदास, दरोगा राजभर, सुजीत सिंह, आशुतोष सिंह, राहुल राम, अमरजीत यादव, अमन गुप्ता, मनीष प्रजापति, बाबू यादव, केशव, धर्मेंद्र सोनकर व जयप्रकाश समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।



















