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Friday, November 28, 2025

बांग्लादेश भेजे गए लोगों को अंतरिम उपाय के तौर पर वापस लाएं: सुप्रीम कोर्ट

बांग्लादेश भेजे गए लोगों को अंतरिम उपाय के तौर पर वापस लाएं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली।
तहलका 24×7
             सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र को एक अंतरिम उपाय के तौर पर पश्चिम बंगाल के उन निवासियों को वापस लाने का सुझाव दिया, जिन पर आरोप है कि उन्हें विदेशी होने के शक में बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया गया था, ताकि उन्हें सुनवाई का मौका दिया जाए। यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने आया, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल थे।
सीनियर वकील कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े मामले में कुछ पार्टियों की ओर से पेश हुए। सुनवाई के दौरान एक वकील ने बेंच के सामने दलील दी कि केंद्र ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। वकील ने दावा किया कि ये भारतीय नागरिक हैं, जिन्हें इधर-उधर फेंक दिया गया है। सीजेआई ने केंद्र के वकील से कहा कि अब रिकॉर्ड पर बहुत सारा मटीरियल आ रहा है। बर्थ सर्टिफिकेट और परिवार के करीबी सदस्यों की जमीन, ये एक तरह के सबूत हैं।
आरोप यह है कि डिपोर्ट किए गए लोगों की कभी सुनवाई भी नहीं हुई और आप उन्हें वापस भेज देते हैं। उन्हें वापस क्यों नहीं लाते?सीजेआई ने आगे कहा कि आप एक टेम्पररी उपाय तौर पर उन्हें वापस क्यों नहीं लाते और उन्हें एक मौका क्यों नहीं देते? उन्हें सुनवाई का मौका क्यों नहीं देते और इन सभी डॉक्यूमेंट्स या फैक्ट्स को वेरिफाई क्यों नहीं करते? एक होलिस्टिक (नजरिया) क्यों नहीं अपनाते? सीजेआई ने कहा अगर बांग्लादेश से अवैध एंट्री हुई है, तो केंद्र का डिपोर्टेशन सही है और कोई भी इस पर बहस नहीं करेगा!
लेकिन अगर किसी के पास आपको यह दिखाने के लिए कुछ है कि मैं भारत का हूं और मैं यहीं पैदा हुआ और पला-बढ़ा हूं, तो उसे आपके सामने दलील देने का अधिकार है। सीजेआई ने कहा उनकी बात सुनें, उन्हें अपनी बात कहने दें और वेरिफिकेशन के लिए डॉक्यूमेंट्स मांगें। आपकी एजेंसियां हैं जो उनको वेरिफाई करेंगी और आप खुद फैसला लेंगे, लेकिन सुनवाई का मौका दें और उसके बाद पूरी तरह से देखें। केंद्र के वकील से सोमवार तक इस मामले में निर्देश लेने को कहा।
यह मामला सितंबर में कलकत्ता हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसमें 4 हफ़्ते के अंदर डिपोर्ट किए गए लोगों को वापस भेजने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने एक हेबियस कॉर्पस पिटीशन पर सुनवाई करते हुए डिपोर्ट किए गए लोगों की राष्ट्रीयता के बावजूद डिपोर्टेशन के लिए अपनाए गए तरीके को गलत पाया था।
भोदू शेख नाम के एक व्यक्ति ने अपनी बेटी, दामाद और पोते को पेश करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिन पर आरोप था कि उन्हें गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया।शेख ने दावा किया कि वह पश्चिम बंगाल के परमानेंट निवासी हैं और उनकी बेटी और दामाद जन्म से भारतीय नागरिक हैं। यह दावा किया गया कि वे पश्चिम बंगाल में परमानेंट रुप से रहने वाले एक परिवार से हैं और नौकरी के लिए नई दिल्ली चले गए थे।

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