जस्टिस के सामने बोले वकील-‘डोंट क्रॉस द लिमिट’, सीजेआई ने कहा- आंख दिखाओगे तो हम निपटना जानते हैं
नई दिल्ली।
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सुप्रीम कोर्ट ने कोर्टरुम में गिरते शिष्टाचार पर कड़ी नाराजगी जताते हुए झारखंड हाई कोर्ट के एक वकील को अवमानना मामले में बिना शर्त माफी मांगने की अनुमति दी है। यह मामला उस घटना से जुड़ा है, जब सुनवाई के दौरान वकील ने जज से कथित तौर पर कहा था “डोंट क्रॉस द लिमिट।” मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष आया।

सुनवाई के दौरान वकील की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उनके मुवक्किल को अपने व्यवहार पर गहरा पछतावा है और वह बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं।इस पर CJI ने वकील के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, वह जजों के सामने यह बात क्यों नहीं समझा सकता? अगर वह आंखें दिखाना चाहता है तो दिखाने दो, हम जानते हैं कि इससे कैसे निपटना है।जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि न्यायपालिका के हर स्तर पर कोर्टरुम में टकराव को पेशेवर गौरव समझने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है।

सीनियर वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि लाइव-स्ट्रीमिंग के दौर में अदालत की कार्यवाही सार्वजनिक हो जाने से वकीलों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि एक अवमानना नोटिस भी किसी वकील के करियर पर गहरा असर डाल सकता है।दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए वकील महेश तिवारी को झारखंड हाई कोर्ट की पांच जजों की पीठ के समक्ष बिना शर्त माफी का हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी। साथ ही शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट से माफी पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का अनुरोध किया।

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य न तो जज का अपमान करना था और न ही न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालना।बताते चलें कि घटना 16 अक्टूबर 2024 को झारखंड हाई कोर्ट में जस्टिस राजेश कुमार के समक्ष सुनवाई के दौरान हुई थी। बिजली कनेक्शन से जुड़े एक मामले में बहस के बाद वकील ने कथित तौर पर कहा कि वह “अपने तरीके से बहस करेगा” और जज से कहा लिमिट क्रॉस मत करो। इस पर हाई कोर्ट की पांच जजों की पीठ, जिसमें तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान समेत अन्य जज शामिल थे, उन्होंने स्वतः संज्ञान लेते हुए वकील को अवमानना नोटिस जारी किया था।








