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Friday, February 20, 2026

अयोध्या–वाराणसी कंट्रोल एक्सेस एक्सप्रेसवे में पांच इंटरचेंज बनने की संभावना, पूर्वांचल की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

अयोध्या–वाराणसी कंट्रोल एक्सेस एक्सप्रेसवे में पांच इंटरचेंज बनने की संभावना, पूर्वांचल की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

# जौनपुर, शाहगंज, केराकत, दोस्तपुर, मालीपुर, अकबरपुर क्षेत्र को मिल सकता है बड़ा लाभ

जौनपुर/अंबेडकरनगर।
एखलाक खान
तहलका 24×7.                                                             पूर्वांचल की यातायात व्यवस्था को नई गति देने जा रहे प्रस्तावित अयोध्या- वाराणसी कंट्रोल एक्सेस एक्सप्रेसवे पर पांच प्रमुख इंटरचेंज बनाए जाने की संभावना बढ़ गई है।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इन इंटरचेंजों के माध्यम से कई राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य एक्सप्रेसवे सीधे जुड़ेंगे, जिससे जौनपुर, शाहगंज, केराकत, दोस्तपुर, मालीपुर और अकबरपुर क्षेत्र को बड़ा लाभ मिल सकता है।हालांकि अंतिम स्थिति विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) और आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

संभावित पांच इंटरचेंज और कनेक्टिविटी के तहत केराकत इंटरचेंज में अयोध्या/वाराणसी कंट्रोल एक्सेस एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग NH-731 (सैदपुर मार्ग), जौनपुर रिंग रोड इंटरचेंज में अयोध्या–वाराणसी कंट्रोल एक्सेस एक्सप्रेसवे पर राष्ट्रीय राजमार्ग 135A, राष्ट्रीय राजमार्ग 128A, शाहगंज इंटरचेंज में अयोध्या/वाराणसी कंट्रोल एक्सेस एक्सप्रेसवे पर राष्ट्रीय राजमार्ग 135A, दोस्तपुर–मालीपुर इंटरचेंज में अयोध्या/वाराणसी कंट्रोल एक्सेस एक्सप्रेसवे पर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग 135A और अकबरपुर इंटरचेंज में अयोध्या/वाराणसी कंट्रोल एक्सेस एक्सप्रेसवे पर राष्ट्रीय राजमार्ग 128 होगा।

कंट्रोल एक्सेस एक्सप्रेसवे की विशेषता पूरी तरह नियंत्रित प्रवेश प्रणाली पर आधारित होगा।कहीं से भी सीधे चढ़ने-उतरने की अनुमति नहीं होगी, केवल निर्धारित इंटरचेंज से ही आवागमन होगा। कोई ट्रैफिक सिग्नल या चौराहा नहीं रहेगा, जिससे वाहन बिना रुके 100–120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकेंगे।ओवरपास और अंडरपास (ग्रेड सेपरेटर) के जरिए अन्य सड़कों को पार कराया जाएगा। दोनों दिशाओं के बीच मजबूत डिवाइडर होगा।

पैदल यात्री, साइकिल, ट्रैक्टर और अन्य धीमी गति के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।इसे ग्रीनफील्ड एलाइनमेंट पर विकसित किए जाने की संभावना है, यानी नई भूमि पर अलग ट्रैक के रुप में निर्माण। इंटरचेंज के संभावित प्रकार क्रमशःयातायात दबाव और भूमि उपलब्धता के अनुसार ट्रम्पेट, डायमंड, क्लोवरलीफ, स्टैक या पार्क्लो इंटरचेंज बनाए जा सकते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार जहां एक्सप्रेसवे का मिलान किसी अन्य बड़े एक्सप्रेसवे से होगा, वहां क्लोवरलीफ या स्टैक इंटरचेंज की संभावना अधिक रहती है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने के लिए ट्रम्पेट या डायमंड इंटरचेंज उपयुक्त माने जाते हैं।

इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से अयोध्या, जौनपुर, शाहगंज,अकबरपुर और वाराणसी के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।औद्योगिक निवेश, पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।खासकर अयोध्या और वाराणसी के बीच सीधी और तेज कनेक्टिविटी से धार्मिक पर्यटन को नई गति मिल सकती है।फिलहाल परियोजना के विस्तृत स्वरूप,भूमि अधिग्रहण और इंटरचेंज के अंतिम डिजाइन को लेकर आधिकारिक डीपीआर और अधिसूचना का इंतजार किया जा रहा है।जैसे ही अंतिम मंजूरी और नक्शा सार्वजनिक होगा, स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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