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Thursday, January 29, 2026

आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की राज्यों को फटकार, कहा- हवाई किले बना रहे अधिकारी

आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की राज्यों को फटकार, कहा- हवाई किले बना रहे अधिकारी

नई दिल्ली।
तहलका 24×7 
                सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आवारा कुत्तों की नसबंदी की सुविधाओं को बढ़ाने के उसके निर्देशों का पालन न करने पर राज्य सरकारों से नाराजगी जताई और कहा कि असम को छोड़कर किसी भी राज्य ने यह डेटा नहीं दिया है कि कितने आवारा कुत्तों ने लोगों को काटा।पीठ ने मौखिक रुप से कहा कि अधिकारी ठोस कदम उठाने के बजाय काल्पनिक बातें कर रहे हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने उसके पहले के निर्देशों के पालन पर राज्यों की दलीलों पर सुनवाई शुरु की।पीठ ने कहा कि वह इस मामले में प्रगति से खुश नहीं है और कहा कि राज्य “कहानी सुनाने” में लगे हुए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, जिन्हें इस मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया गया है, ने विभिन्न राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों की संक्षेप में जानकारी दी, साथ ही राज्यों के दृष्टिकोण में खामियों और कमियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकारों को पशु जन्म नियंत्रण सुविधाएं बढ़ानी होंगी, आवारा कुत्तों की नसबंदी बढ़ानी होगी।
अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने प्रस्तुत किया कि कुछ राज्यों ने शीर्ष अदालत के निर्देश के अनुरुप कदम उठाए हैं, लेकिन पूरी तरह अनुपालन के लिए अभी भी लंबा रास्ता तय करना है। उन्होंने कहा कि राज्यों को डॉग पाउंड (पशु आश्रय) बनाने होंगे, संस्थागत क्षेत्रों की बाड़बंदी करनी होगी और सड़कों और राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाना होगा।पीठ को बताया गया कि असम में 2024 में कुत्तों के काटने के 1.66 लाख मामले दर्ज हुए थे, लेकिन राज्य में सिर्फ एक डॉग सेंटर है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह हैरान करने वाला है। 2024 में कुत्तों के काटने के 1.66 लाख मामले थे और 2025 में सिर्फ जनवरी में 20,900 मामले थे।
यह चौंकाने वाला है। बिहार सरकार की पहल की ओर इशारा करते हुए न्याय मित्र अग्रवाल ने कहा कि राज्य में 34 पशु जन्म नियंत्रण केंद्र हैं, जहां उनके अनुसार 20,648 कुत्तों की नसबंदी की गई है।उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने (केंद्रों ने) यह नहीं बताया है कि प्रतिदिन कितने कुत्तों की नसबंदी की गई है, और यह आंकड़ा कितने समय का है।अग्रवाल ने कहा कि राज्य को एबीसी केंद्रों का पूरा ऑडिट करना चाहिए था। उन्होंने कहा, अगर राज्य में छह लाख से अधिक कुत्ते हैं, तो 20,648 कुत्तों का नसबंदी काफी नहीं है।
अभी 91 कुत्ते पाउंड्स में बंद हैं। अग्रवाल ने कहा कि हलफनामे में यह संकेत नहीं दिया गया है कि कितने संस्थागत क्षेत्रों में सर्वेक्षण किया गया है ताकि यह देखा जा सके कि क्या बाड़ा चारदीवारी आदि हैं। पीठ ने कहा, वे सभी हवा में किले बना रहे हैं। अदालत ने कहा कि असम को छोड़कर किसी भी राज्य ने यह डेटा नहीं दिया है कि आवारा कुत्तों के काटने की कितनी घटनाएं हुईं।हालांकि, बिहार सरकार की ओर से पेश हुए वकील मनीष कुमार ने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है और तीन महीने के अंदर काफी प्रगति होगी।
पीठ ने कहा कि राज्य अस्पष्ट बयान नहीं दे सकते और कहा, हम उन राज्यों को कड़ी फटकार लगाने जा रहे हैं जो अस्पष्ट बयान देते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गोवा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, झारखंड और गुजरात की दलीलें भी सुनीं। कोर्ट ने पाया कि स्कूलों और अस्पतालों में आवारा जानवरों के घुसने से रोकने के लिए संस्थागत क्षेत्र में बाड़ लगाने के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। पीठ ने कहा हर सार्वजनिक भवन में फेंसिंग होनी चाहिए, न सिर्फ आवारा कुत्तों या दूसरे जानवरों की वजह से बल्कि संपत्ति को चोरी से बचाने के लिए भी।
अदालत ने कहा कि राज्य कहानी सुनाने में लगे हैं और जमीन पर कुछ भी ठोस होता नहीं दिख रहा है।अग्रवाल ने कहा कि वह गुरुवार को पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना द्वारा उठाए गए कदमों की संक्षिप्त जानकारी देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई गुरुवार को तय की है। संज्ञान लिए गए एक केस की सुनवाई कर रही है। यह केस एक मीडिया रिपोर्ट पर शुरु हुआ था, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली में आवारा कुत्तों के काटने से खासकर बच्चों में रेबीज होता है।

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