एसआईआर के दौरान बीएलओ की मौतों के पीछे साजिश!
# भाजपा ने की सीबीआई जांच की मांग, विपक्ष पर उठाए सवाल
नई दिल्ली।
तहलका 24×7
विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन अभ्यास के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों की मौतों को लेकर विपक्ष और सत्तारुढ़ भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।विपक्षी दलों ने भारत निर्वाचन आयोग और भाजपा पर बीएलओ पर अत्यधिक कार्यभार डालने का आरोप लगाते हुए इसे ‘वोट चोरी का घातक मोड़’ करार दिया है, वहीं भाजपा ने इन आरोपों को ‘झूठा नैरेटिव’ बताते हुए सीबीआई से जांच की मांग की है।

पार्टी का कहना है कि क्या वाकई एक महीने में 1000-1500 घरों का सत्यापन मौत का कारण बन सकता है या इसके पीछे कोई और साजिश है? भाजपा ने सवाल उठाया है कि विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे ये नैरेटिव विदेशी हैंडल्स और टूल किट्स से प्रचारित तो नहीं हो रहे, जिसकी गहन जांच जरुरी है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने यह बात उठाई। भाजपा प्रवक्ता ने बीएलओ की मौत को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवाल और एसआईआर पर विपक्ष और कुछ कथित विदेशी हैंडल से बनाई जा रही धारणा की गहन जांच की मांग उठाई है, यहां तक कि भाजपा ने इस पर सीबीआई जांच तक की भी मांग उठा दी।

भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि इस प्रक्रिया में बीएलओ को अपने बूथ क्षेत्र के हर घर का सत्यापन करना पड़ता है, जिसमें औसतन 1000 से 1500 घरों तक पहुंचना शामिल है। यह काम एक महीने में पूरा करने का टारगेट क्या बीएलओ पर इतना अधिक है कि पश्चिम बंगाल, झारखंड और अन्य राज्यों में कई बीएलओ की मौतें दर्ज की जा रही हैं। क्या एक दिन में लगभग 30 से 35 घरों में जाना मौत का कारण बन सकता है या विपक्ष द्वारा नेगेटिव नैरेटिव फैलाया जा रहा है।इस पर गहन जांच होनी चाहिए।

उन्होंने सीधे-सीधे विपक्ष पर देश के खिलाफ विदेशी ताकतों के हाथ में बिकने आरोप लगाया है।यदि आंकड़ों के अनुसार देखें तो, एसआईआर के दूसरे चरण में ही 16 से अधिक बीएलओ की संदिग्ध मौतें हुई हैं, जिनमें से कई को आत्महत्या या हार्ट अटैक से जोड़ा जा रहा है।रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल में हाल ही में जालपाईगुड़ी की बीएलओ शांति मुनी एक्का की कथित आत्महत्या ने विवाद को भड़का दिया। उनके परिवार ने दावा किया कि एसआईआर के दबाव के कारण उन्होंने सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें कार्यभार का जिक्र था।

इसी तरह कोलकाता में बीएलओ ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने कार्य तनाव के खिलाफ आवाज उठाई। उधर, विपक्षी नेता इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा पर ‘वोट चोरी का घातक कदम’ उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एसआईआर अभ्यास नोटबंदी और कोविड लॉकडाउन की तरह जल्दबाजी में लागू किया गया है, जिससे बीएलओ की मौतें हो रही हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया ‘अराजक’ है और बीएलओ पर अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है। ममता ने चुनाव आयोग से एसआईआर रोकने की मांग की और दावा किया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं पर ही दबाव डाला जा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे ‘सुधार नहीं, अत्याचार’ करार देते हुए कहा कि एसआईआर देश में अराजकता फैला रहा है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा एसआईआर के जरिये विपक्ष की मजबूत पकड़ वाले क्षेत्रों में मतदाता सूची से नाम काटने की साजिश रच रही है, जिससे बीएलओ पर दबाव बढ़ा है।

बताते चलें कि निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभ्यास का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पारदर्शी बनाना है। इसी प्रक्रिया के तहत एक बीएलओ को लगभग 1000-1500 घरों में जाकर मतदाताओं का सत्यापन करने का काम दिया गया है, जो नियमित प्रक्रिया के अंतर्गत आता है।







