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Saturday, February 28, 2026

चुनावों में राजनीतिक पार्टियों द्वारा रुपये के गलत उपयोग मामले की याचिका पर एससी विचार को सहमत

चुनावों में राजनीतिक पार्टियों द्वारा रुपये के गलत उपयोग मामले की याचिका पर एससी विचार को सहमत

नई दिल्ली।
तहलका 24×7 
               सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव के लिए राजनीतिक पार्टियों द्वारा पैसे की ताकत के बिना रोक-टोक इस्तेमाल के खिलाफ एक याचिका पर विचार करने के लिए तैयार हो गया और इस बात पर जोर दिया कि चुनावों में पैसे की ताकत का बिना रोक-टोक प्रयोग रोका जाना चाहिए।यह मामला सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल पंचोली की बेंच के सामने आया।एनजीओ कॉमन कॉज के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह एक ऐसा मुद्दा है जो हमारे लोकतंत्र की जड़ तक जाता है।
भूषण ने कहा कि आज कानून के तहत हर उम्मीदवार के खर्च की लिमिट है, हालांकि यह लिमिट अक्सर लागू नहीं होती, क्योंकि लोग कैश में खर्च करते हैं। जस्टिस बागची ने कहा कि भूषण के प्रस्ताव से आगे भी कुछ है और उन्होंने यूएस चुनावों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि एक पार्टी के लिए खर्च की लिमिट होती है और जब वह लिमिट पूरी हो जाती है, तो उम्मीदवार के दोस्तों के बीच समझौता होता है।
जस्टिस बागची ने पूछा, मान लीजिए कि एक इंडियन-अमेरिकन पैक्ट आपको फंड देगा,तो इसकी लिमिट क्या है?और उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टी के दोस्त फंड देंगे।जस्टिस बागची ने भूषण से कहा कि यदि एक्स सीमा से परे कोई फंडिंग नहीं है,तो वह अनुच्छेद 19 (1) (ए) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भौतिक समर्थन के माध्यम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए अदालत के सामने आएंगे,पूछा कि हम इसे कैसे नियंत्रित करेंगे? जिसपर भूषण ने दलील दी कि संसद ने कैंडिडेट पर रोक लगा दी है।बेंच ने जवाब दिया कि अब वह चाहते हैं कि यह रोक राजनीतिक पार्टी तक बढ़ा दी जाए, जिस पर भूषण सहमत हो गए।
पीठ ने पूछा, क्या यह पर्याप्त होगा? भूषण ने कहा कि अगर मैं किसी कैंडिडेट पर पैसा खर्च करता हूं,तो आम तौर पर यह उनके चुनाव खर्च में कैलकुलेट होता है, अगर कोई राजनीतिक पार्टी खर्च करती है तो यह कैलकुलेट नहीं होता और बदकिस्मती से राजनीतिक पार्टी पर कोई लिमिट नहीं है कि वह एक साल में कितना अधिक खर्च कर सकती है।उन्होंने कहा, इस कोर्ट ने चुनावी बांड (केस) में कई पैराग्राफ में कहा था कि यह एक अभिशाप है।
यह एक बहुत बड़ी समस्या है और यह हमारी चुनावी लोकतंत्र को बिगाड़ रही है और चुनावों वगैरह में राजनीतिक पार्टियां पैसे की ताकत का बिना रोक-टोक इस्तेमाल कर रही हैं और इसे रोकने की जरूरत है। इस पर अंकुश लगाने की जरूरत है, भूषण ने तर्क दिया। दलीलें सुनने के बाद बेंच ने याचिका पर नोटिस जारी किया। फिलहाल 6 सप्ताह बाद मामले पर सुनवाई करने की संभावना है।

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